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जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने किया स्थानीय लोगों से टोल टैक्स वसूली का विरोध

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अनुराग शर्मा सीहोर

लंबे समय से जिला मुख्यालय के समीपस्थ फंदा टोल नाके पर स्थानीय वाहनों से टैक्स वसूली टोल के कर्मियों की मनमानी को साबित करता है। जिले से पंजीकृत वाहन के स्वामी जब टैक्स देने में आनाकानी करते हैं तो वसूली लगे कर्मी उनसे झगड़ा व मारपीट करने तक पर उतारू हो जाते हैं। उक्त आरोप जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद की एक विशेष बैठक के दौरान स्थानीय नागरिकों ने कही। शहर के बस स्टैंड स्थित पेट्रोल पंप पर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव वंशकार से शिकायत की गई। एक दिवसीय कार्यशाला के पहले विशेष अतिथि के रूप में उपभोक्ता फोरम के सदस्य सोमेन्द्र सक्सेना और परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वंशकार का स्वागत परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शैलेश पटेल, जिलाध्यक्ष विष्णु प्रजापति, प्रेम लता राठौर, अतिया औसफ, नरेन्द्र डाबी सहित अन्य ने किया।
इस संबंध में जानकारी देते हुए परिषद के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि परिषद की बैठक के दौरान उपभोक्ताओं ने अपनी समस्या को बताया था। जिसमें स्थानीय लोगों को यात्रा करने पर परेशानी होती है। टोल नाकों के पास से गुजरने वाले लोगों से लेकर शहरी क्षेत्र के लोग टोल टैक्स जमा करते-करते अब विरोध की राह पर आ गए हैं। लोगों का कहना है कि हम अपने ही जिले में 10-15 किमी घूमने भी निकलें तो टोल देना पड़ता है। शहर के लोग नौकरी करने जाएं या शादी समारोह में उन्हें कई बाद टोल टैक्स देना पड़ता है। वहीं ग्रामीण एक गांव से दूसरे गांव जाएं या अपने खेत जाएं उन्हें टोल टैक्स देना पड़ता है। स्थानीय लोग लगातार बढ़ते टोल टैक्स और टोल नाकों से परेशान हो गए हैं और अब आंदोलन की राह पर हैं। जहां इछावर के लोगों ने सड़क खराब होने पर भी टोल वसूली का विरोध किया, शिकायतें की और आंदोलन किए तो टोल से वसूली पूरी तरह बंद हो गई।
सीहोर से भोपाल की दूरी 37 किमी है। जिसके बीच में फंदा में टोल नाका पड़ता है। जो सीहोर से 14 किमी की दूरी पर है। इस नाके पर चार पहियां वाहन के लिए टोल के राशि देना पड़ती है। जबकि सीहोर के लोग अधिकतर पुराने रोड से जाते हैं। जिसके चलते उन्हें 14 किमी पुराने रोड से गुजरना पड़ता है। 14 किमी का रास्ता पुराने रोड से तय करने के बाद भी लोगों को 23 किमी की दूरी के पूरे रुपये देने पड़ते हैं। वहीं सीहोर के कई मैरिज गार्डन व कई लोगों की जमीन टोल पार करने के बाद भोपाल रोड पर है। इन्हें भी 15 किमी का सफर तय करने पर रुपये टोल देना होता है। वहीं आने का भी इतना ही टोल लोगों को चुकाना पड़ता है। वहीं कई लोगों की खेती इस रोड पर है। वहां आने जाने के लिए भी लोगों को शुल्क देना पड़ता है। इसके लिए स्थानीय लोगों को कोई रियायत भी नहीं दी जाती है। जिससे लोगों में आक्रोश है।

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