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महावीर जयंती पर विशेष::भगवान महावीर स्वामी को संपूर्ण विश्व ने माना लेकिन उनकी बात नहीं मानी इसीलिए विश्व मे अशांति

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आलेख

सुरेंद्र जैन

कभी आर्यवर्त के नाम से प्रसिद्ध रही इस धरा पर संसारी प्राणी को सद्मार्ग दिखाने समय समय पर ऐसी महान आत्माओ का जन्म हुआ जो जन्म लेकर संसार को सद्मार्ग दिखाते हुए अपनी आत्मा का कल्याण की ओर मोक्ष मोक्ष को प्राप्त कर जन्म मरण के बंधन से अपनी आत्मा को मुक्त किया ऐसी ही महान आत्मा थी अंतिम केवली भगवान महावीर स्वामी की देह में मनुष्य योनि में जन्म लेकर उन्होंने संसारी प्राणी को आत्मकल्याण का सदमार्ग दिखाया सिर्फ दिखाया नहीं अपितु उस कठिन तप के मार्ग पर चलकर दिखाते हुए अपनी आत्मा का कल्याण भी किया लेकिन संसारी प्राणी ने संपूर्ण संसार मे भगवान महावीर स्वामी को माना तो उनकी पूजन उनकी जिन प्रतिमा का नित्य अभिषेक आदि सब किया लेकिन उनकी बात नहीं मानी यदि संसारी प्राणी उनकी बात मानता जीवन चर्या में अपनाता तो प्रत्येक घर परिवार समाज गांव शहर कस्बा प्रदेश ओर देश मे ही नहीं अपितु संपूर्ण संसार मे सुख शांति समृद्धि होती।
भगवान महावीर स्वामी का जन्म कब कहाँ किनके घर हुआ यह तो सदैव हम सुनते आए हैं इसलिए उस विषय से हटकर आज हमें इस सत्य को समझने की आवश्यकता है कि क्या हमने कभी अंतिम केवली भगवान महावीर स्वामी की एक भी बात मानी है क्या उनके द्वारा दिये गए शुभ सन्देशों को अपनी जीवन चर्या में शामिल किया है शायद नहीं यदि हम महान तपस्वी आचार्यश्री शान्तिसागर जी आचार्यश्री विद्या सागर जी आदि हजारों जैन मुनियो जैन साध्वियों की बात करें तो उन्होंने तो भगवान महावीर स्वामी के बताये मार्ग का अनुशरण किया और अपनी आत्मा का कल्याण किया और बर्तमान में भी कर रहे हैं लेकिन संसार के आज भी 99 प्रतिशत लोग भगवान महावीर स्वामी के बताए सद्मार्ग के ठीक विपरीत चल रहे हैं यही कारण है कि आज सारे विश्व मे अशांति हैं घर घर मे गांव गांव में सुख शांति समृद्धि मानो गायब हो चुकी है।

*जियो ओर जीने दो*
भगवान महावीर स्वामी का जब जन्म हुआ तब ये सारा भारत ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व अशांति ओर हिंसा के दौर से गुजर रहा था तब उन्होंने संसार को अहिंसा का शुभ संदेश दिया उनके शुभ सन्देश ओर उनके तप के प्रभाव से शेर जैसे खूंखार वन्य प्राणी ओर गाय भी एक घांट पानी पीने लगे थे प्राणिमात्र में दया करुणा की भावनाएं जाग्रत करते हुए उन्होंने संसारी प्राणी को जियो ओर जीने दो का शुभ स संदेश दिया
जियो ओर जीने दो के इसी शुभ सन्देश में छिपा है विश्व शांति का मूल मंत्र यदि संसार मे जन्मा हर प्राणी इस शुभ सन्देश को अपनी जीवन चर्या में अपनाता ले तो ये सारा संसार ही एक परिवार की तरह हो जाएगा और सारे विश्व मे सुख शांति समृद्धि होगी
जियो मतलब जिस तरह आप जीना चाहते हैं और जीने दो अर्थात उसी तरह संसार के हर प्राणी को भी जीने दीजिये
चौरासी लाख योनि के किसी भी जीव को किसी भी तरह की तकलीफ न दें अपने स्वार्थ के लिए धर्म के नाम पर किसी भी जीव को कभी न मारें किसी भी जीव की न तो वलि दें न कभी किसी चींटी को भी अपने पैरों में आने दें प्राणी मात्र की रक्षा ही जीवो पर दया करुणा ही परम धरम है और इसी से घर परिवार समाज गांव शहर प्रदेश देश और दुनिया मे सुख शांति समृद्धि आएगी

 

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