रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित शहर के प्राचीन तालाब फुटेरा में आज जलकुंभी,चोई और गंदगी आधुनिकता का परिचय देती प्रतीत हो रही है।

वैसे तो इस तालाब के साथ साथ शहर के अन्य तालाबों का महत्व रहा है, पर जल स्रोतों के रखरखाव और संरक्षण के प्रति उदासीन रवैये के कारण अन्य की तरह यह भी अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है। इसके विनिमय क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट पर भूमाफियाओं द्वारा कब्जा और अवैध निर्माण की शिकायत भी संबंधित विभागों तक पहुंची और जागरूक लोग कार्यवाही का इंतजार कर रहे है, स्थानीय युवाओं का एक समूह भी इसके संरक्षण के लिए प्रयास कर रहा है जिस कारण कुछ सफलता भी मिली परंतु अभी भी काफी परिवर्तन और सुधार की आवश्यकता है।

शहर के बड़े तालाब के रूप में पहचान रखने वाले इस तालाब में विभिन्न प्रकार के जलचर और प्रवासी पक्षी भी दिखाई देते है कुछ रंगबिरंगे जलचर तो साल भर यहां रहते है जिसके कारण इसकी खूबसूरती भी बढ़ जाती है और आस पास के लोग यहां समय व्यतीत करते देखे जाते है अगर यहां सौंदर्यीकरण और लगातार देखरेख की जाए तो इस ऐतिहासिक महत्व के स्थल को बेहतर पहचान मिल सकती है।

फुटेरा तालाब संरक्षण समिति के सदस्य नित्याप्यासी और शिवराम रैकवार बताते हैं कि पहले यहां गंदगी व्याप्त थी लोग आना भी पसंद नहीं करते थे,पिछले 5 वर्षों से स्थानीय रैकवार युवा और अन्य लोगों के साथ धीरे धीरे प्रयास किया जलकुंभी, चोई और घाट की सफाई के साथ पानी में कीटनाशक का छिड़काव भी किया, तालाब के किनारे फैंसिंग और पौधारोपण किया,गंदगी न फैलाने के बोर्ड लगवाए गए जिससे कुछ बेहतर हुआ परंतु इस क्षेत्र की सफाई, सुरक्षा के लिए कई बार ज्ञापन व आवेदन स्थानीय प्रशासन को दिए है पर कार्यवाही की गति बहुत धीमी है बदलाव के लिए एक मुहिम की आवश्यकता है। तालाब में जलकुंभी,चोई,गंदगी दिखाई देने लगी है। एक वाटर फाउंटेन नगर पालिका द्वारा लगाया गया था जो कुछ ही दिनों में बंद हो गया, जिसे ठीक करवाने के लिए नपा को आवेदन दिए पर इसे सुधारा नहीं गया।