108 कुंडिया विराट गायत्री महायज्ञ में हरिद्वार से भी पधारी यज्ञ मंडलियां ,बड़ी संख्या में उमडा जन सैलाब
विदिशा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वाधान में विदिशा में हो रहे 108 कुंडीय विराट गायत्री महायज्ञ में हरिद्वार से पधारी यज्ञ मंडली द्वारा वेदों की ऋचाओं ,33 कोटी देवी देवताओं के आह्वान के वैदिक मंत्रों से यज्ञ परिसर गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि 33 कोटि देवताओं के आह्वान के बाद गायत्री यज्ञ प्रारंभ हुआ। जिसमें आज बसंत पंचमी का पर्व मुख्य रूप से मनाया गया और कई बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार संपन्न करवाया गया ।हरिद्वार से पधारी यज्ञ टोली के मुख्य वक्ता पंडित सुनील शर्मा जी ने बताया कि गायत्री माता को चित्र में नहीं चित्त में स्थापित करना है ।हर युग में बड़े परिवर्तन गायत्री और यज्ञ से ही संभव हुए हैं। जैसे महाराज दशरथ ने श्रृंगी ऋषि के निर्देशन में त्रेता में पुत्र कामेष्टी यज्ञ किया। जिसके कारण उन्हें भगवान श्री राम जैसी संतान की प्राप्ति हुई। सर्व विदित है कि मुनि विश्वामित्र ने ही गायत्री महामंत्र की रचना की थी। द्वापर में भी द्रौपदी यज्ञ से उत्पन्न हुई थी, इसलिए यज्ञसेनी कहलाई। कृष्ण जी भी गायत्री त्रिकाल साधना करते थे । इन दोनों के कारण ही महाभारत हुआ। जिससे द्वापर युग में अधर्म का नाश हुआ और धर्म की स्थापना हुई। यह निश्चित है कि कलयुग में भी यज्ञ और गायत्री से ही परिवर्तन होगा। परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24 महापुरश्चरण का तप किया। जिसके फल से यह अखिल विश्व गायत्री परिवार आज पूरे विश्व में वैचारिक परिवर्तन की क्रांति ला रहा है। लायंस क्लब विदिशा मेंन के सहयोग से प्रसाद वितरण हुआ तथा यज्ञ के बाद लोगों ने यज्ञस्थल पर भंडारे में भोजन प्रसादी ग्रहण की। आकर्षक रंगोली और सजल श्रद्धा और प्रखर प्रज्ञा की झांकी आकर्षण का केंद्र रही
पर्यावरण का संदेश देने के लिए मुफ्त वृक्ष वितरित किए गए । नशा मुक्ति का संदेश देने वाली प्रदर्शनी पर कई लोगों का उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने नशे से दूर रहने की शपथ ली। साथ ही यज्ञ स्थल पर अग्निहोत्र गुरुदेव का सत साहित्य और गायत्री परिवार और पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी में भी लोगों ने भाग लिया।शाम को भजन और प्रवचनों का आयोजन हुआ।कल सुबह 8:00 बजे से गायत्री यज्ञ होगा और पुंसवन व नामकरण के साथ ही कई अन्य संस्कार निशुल्क संपन्न कराए जाएंगे।