धीरज जॉनसन दमोह
शहर से लगभग 36 किमी दूर स्थित बटियागढ़ तहसील अपने अंदर इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में परिचित रही है। यहां प्राकृतिक छटा, ऊँचे पहाड़, प्राचीन किले की टूटी दीवारें,बावड़ी, कलाकृतियां तथा सुनार नदी की सहायक नदी ‘जूड़ी’ इस क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं।

जूड़ी नदी पहाड़ों के मध्य से सर्पाकार रूप में बहती हुई गुजरती है, जहां का मनोरम दृश्य प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करता है। शांत वातावरण में पशु चराते चरवाहों की आवाजें एवं पक्षियों का मधुर कलरव माहौल को मनमोहक बना देता है जो क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकते है।

नदी किनारे चट्टानों पर विभिन्न प्रकार की प्राचीन आकृतियां दिखाई देती हैं, जिनमें मानव एवं पशु आकृतियों का स्पष्ट चित्रण मिलता है। यह प्राचीन रॉक आर्ट इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता व पुरातात्विक महत्व को दर्शाती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नदी किनारे अलग-अलग स्थानों पर ऐसी आकृतियां बनी हुई हैं।

इस तरह के चित्र आदिमानव काल की सांस्कृतिक गतिविधियों एवं जीवनशैली का संकेत देते हैं। यदि इन स्थलों का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया जाए तो नई जानकारी भी सामने आ सकती है।