अभिनय की बारीकियों के साथ साझा किए रंगमंच और सिनेमा के अनुभव
सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
रीवा। खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के संस्थापक एवं सुप्रसिद्ध अभिनेता राजा बुंदेला ने रंग उत्सव नाट्य समिति, रीवा के कलाकारों एवं विद्यार्थियों से विशेष संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अभिनय, रंगमंच और सिनेमा से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को अभिनय की बारीकियां भी सिखाईं।
रंग उत्सव नाट्य समिति द्वारा आयोजित अभिनय कार्यशाला में राजा बुंदेला ने विद्यार्थियों से कहा कि कलाकार के लिए सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। रंगमंच हो या सिनेमा, प्रत्येक भूमिका कलाकार को कुछ नया सीखने का अवसर देती है। उन्होंने अभिनय के लिए संवेदनशीलता, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और समाज को समझने को महत्वपूर्ण बताया।
संवाद के दौरान उन्होंने खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की स्थापना और उसकी अब तक की यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की शुरुआत एक विचार से होती है, लेकिन उसे सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास, दृढ़ संकल्प और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। टीम के सहयोग और निरंतर प्रयासों से फेस्टिवल ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

विद्यार्थियों ने अभिनय, रंगमंच, फिल्मों में अवसर और कलाकारों के संघर्ष से जुड़े सवाल पूछे, जिनका राजा बुंदेला ने सहजता से जवाब देते हुए अपने अनुभवों के कई प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि रंगमंच कलाकार को अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास सिखाता है, वहीं सिनेमा कैमरे के सामने सूक्ष्म अभिनय और अभिव्यक्ति की समझ विकसित करता है।
इस अवसर पर खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सीईओ विवेक सरन, मनमोहन सिंह (टीटू), अंकित मिश्रा, शुभम पांडेय, गौरव सिंह एवं संस्था के संरक्षक विभु सूरी सहित रंग उत्सव नाट्य समिति के छात्र-कलाकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा। यह संवाद रंगमंच और सिनेमा के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर भी बना।