पंडित कमल किशोर नागर को कथित धमकी भरे पत्र के विरोध में बम्होरी में उतरा सनातन समाज, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
संत पंडित कमल किशोर नागर को कथित धमकी से आक्रोश, बम्होरी में निकली विशाल रैली
तारकेश्वर शर्मा बम्होरी रायसेन
पूज्य संत पंडित कमल किशोर नागर को कथित धमकी भरा पत्र मिलने की जानकारी सामने आने के बाद समर्थकों और श्रद्धालुओं में आक्रोश का माहौल है। मामले में निष्पक्ष जांच, पत्र भेजने वाले की पहचान और संत एवं उनके परिवार की सुरक्षा की मांग को लेकर बम्होरी में सनातन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने विशाल रैली निकाली।
जानकारी के अनुसार, जिला झाबुआ के भूराडाबरा स्थित श्री गुरु कृपा शबरी गोशाला में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया था। बताया गया कि 4 सितंबर 2026 की रात सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई सामग्री, शाल और श्रीफल आदि के बीच एक कथित धमकी भरा पत्र मिला। पत्र में पंडित कमल किशोर नागर और उनके परिवार को धमकी दिए जाने की बात सामने आने के बाद उनके अनुयायियों में चिंता और नाराजगी फैल गई।

झंडा चौक से तहसील परिसर तक निकली रैली
मामले के विरोध में बम्होरी में निकाली गई रैली झंडा चौक से शुरू हुई। रैली मुख्य बाजार, दिल्हारी, मेघनगर बस स्टैंड और रानी अवंती बाई चौराहे से होते हुए तहसील परिसर पहुंची। रैली में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने कथित धमकी भरे पत्र की गंभीरता से जांच कराने, पत्र भेजने वाले की पहचान करने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
रैली के बाद प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार बम्होरी महेंद्र सिंह राजपूत को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से पंडित कमल किशोर नागर और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की गई।
समर्थकों का कहना है कि गौसेवा, सनातन संस्कृति और सामाजिक जागरूकता से जुड़े संत को कथित तौर पर धमकी दिया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई कर सुरक्षा और विश्वास का वातावरण कायम करने की मांग की।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मामले में कथित धमकी भरे पत्र की वास्तविकता और उसे भेजने वाले व्यक्ति की पहचान जांच का विषय है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पत्र किसने भेजा और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी। अब श्रद्धालुओं और समर्थकों की नजर पुलिस-प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।