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एईओ के कार्यालय तैयार, पद खाली, 13 साल से नियुक्ति का इंतजार

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– 2013 में चयन परीक्षा, रिजल्ट और दस्तावेज सत्यापन के बाद भी नियुक्ति नहीं, अब सरकार ने फिर बीआरसी-एपीसी के लिए निकाला विज्ञापन

भोपाल। मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में शासन की नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच का विरोधाभास एक बार फिर सामने आया है। विभाग में एरिया एजुकेशन ऑफिसर (एईओ) के लिए वर्ष 2013 में परीक्षा कराकर चयन प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद 13 साल से नियुक्तियां अटकी हुई हैं। अभ्यर्थियों के दस्तावेज और सेवा अवधि का सत्यापन तक कराया गया, एईओ के लिए कार्यालय और संकुल भी निर्धारित किए गए, शिक्षा पोर्टल पर सेटअप तैयार हुआ, लेकिन पदस्थापना आज तक नहीं हो सकी। अब इसी बीच राज्य शिक्षा केंद्र ने 2 सितंबर को विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (बीआरसी) और एपीसी की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। नए विज्ञापन के बाद 2013 में एईओ के लिए चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश सामने आया है। उनका सीधा सवाल है कि जब एईओ व्यवस्था के जरिए बीआरसी की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की योजना थी, तो फिर उसी व्यवस्था के लिए नई भर्ती क्यों?

परीक्षा ली, फीस ली, रिजल्ट निकाला, फिर नियुक्ति क्यों नहीं?

एईओ पदों के लिए 8 सितंबर 2013 को ऑनलाइन चयन परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके पांच दिन बाद 13 सितंबर को परिणाम घोषित हुआ। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज, सेवा अवधि और पात्रता का विभागीय स्तर पर सत्यापन कराया गया। अनुभव के अंकों और पांच वर्ष की सेवा अवधि की पात्रता को लेकर कुछ अभ्यर्थी न्यायालय भी पहुंचे। इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज और सेवा अवधि की दोबारा जांच की गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि शासन ने चयन प्रक्रिया पूरी कराने में किसी स्तर पर कमी नहीं छोड़ी, लेकिन अंतिम नियुक्ति के समय पूरी प्रक्रिया ही ठहर गई। 2013 से 2026 तक चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति की प्रतीक्षा करते रहे। इस दौरान कुछ अभ्यर्थी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

एईओ व्यवस्था के लिए ढांचा तैयार, फिर भी पदस्थापना नहीं

चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक एईओ व्यवस्था लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां भी की गई थीं। एईओ कार्यालय निर्धारित किए गए और संकुल केंद्रों का निर्धारण किया गया। शिक्षा पोर्टल पर एईओ का सेटअप भी तैयार किया गया। इसके बावजूद नियुक्ति नहीं होने से सवाल उठता है कि जब व्यवस्था का प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा चुका था, तो उसे संचालित करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई?

बीआरसी व्यवस्था खत्म करने की बात, फिर उसी के लिए भर्ती

राज्य शिक्षा सेवा के गठन के पीछे उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाना और प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया था। प्रस्तावित व्यवस्था में एईओ को महत्वपूर्ण भूमिका दी जानी थी और बीईओ-बीआरसी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना था। लेकिन अब बीआरसी और एपीसी की नियुक्ति के लिए नया विज्ञापन जारी होने से एईओ व्यवस्था की उपयोगिता और सरकार की नीति पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि बीआरसी व्यवस्था को ही जारी रखना है तो 2013 में एईओ के लिए परीक्षा और चयन क्यों कराया गया? और यदि एईओ व्यवस्था लागू करनी है तो 13 साल बाद भी नियुक्तियां क्यों लंबित हैं?

दो विभागीय व्यवस्थाओं के बीच भी उलझा मामला

शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक माध्यमिक स्तर पर राज्य शिक्षा केंद्र और हाईस्कूल-हायर सेकंडरी स्तर पर लोक शिक्षण संचालनालय की अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित हैं। एईओ व्यवस्था का उद्देश्य इन व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और प्रशासनिक एकरूपता स्थापित करना भी माना गया था।
चयनित अभ्यर्थियों का आरोप है कि एईओ व्यवस्था का ढांचा तैयार होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया और अब पुरानी व्यवस्था को ही नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है।

चयनित अभ्यर्थियों की मांग, पहले एईओ का फैसला हो

2013 की चयन प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पहले एईओ नियुक्ति के मामले में स्पष्ट निर्णय ले। उनका कहना है कि वे किसी नई भर्ती की मांग नहीं कर रहे, बल्कि सरकार द्वारा 13 साल पहले शुरू की गई चयन प्रक्रिया को उसके तार्किक परिणाम तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने बीआरसी-एपीसी भर्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार करते हुए पात्र एईओ चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है।

पांच सवाल, जिनका जवाब जरूरी

1. 2013 में परीक्षा और चयन के बाद नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
2. दस्तावेज और सेवा अवधि का सत्यापन कराने के बाद प्रक्रिया क्यों रोकी गई?
3. एईओ के कार्यालय और पोर्टल सेटअप तैयार होने के बावजूद पदस्थापना क्यों नहीं हुई?
4. बीआरसी व्यवस्था में बदलाव होना था तो 2026 में फिर बीआरसी की भर्ती क्यों?
5. 13 साल से इंतजार कर रहे चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर सरकार का फैसला कब होगा?

अब असली सवाल यही है कि सरकार 13 साल पुरानी एईओ चयन प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाएगी या बीआरसी की पुरानी व्यवस्था को ही आगे बढ़ाती रहेगी।

चयनित एईओ राज सावले, अशोक बाजपेई, अजय चौरसिया, अरविंद राय, आरके जैन, प्रमोद पवांर, सुबोध झारिया, दीपकराज श्रीवास्तव, अनिल चौकसे, शांता यादव आदि ने शासन से इस ओर ध्यान देकर तत्काल चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है।

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