ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर बागेश्वर धाम के लिए निकली पदयात्रा, कंधे पर हनुमान जी का गदा लेकर चल रहे श्रद्धालु
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर बुधवार सुबह उस समय धार्मिक माहौल नजर आया, जब ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन के बीच श्रद्धालुओं की एक मंडली हनुमान जी की गदा लेकर बागेश्वर धाम के लिए पदयात्रा पर निकली। सड़क से गुजर रही इस पदयात्रा को देखने के लिए लोगों की भीड़ भी जुटी और जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।
यह ‘संस्कार, संस्कृति, कर्तव्य’ पदयात्रा 30 अगस्त को सुबह नीलकंठ महादेव मंदिर, सागोर से प्रारंभ हुई थी। यात्रा में शामिल सभी पदयात्री हनुमान जी की गदा लेकर बागेश्वर धाम की ओर रवाना हुए हैं। यात्रा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही संस्कार, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
एक गदा, दो कंधे और लगातार जारी यात्रा
पदयात्रा की सबसे खास बात यह है कि हनुमान जी की गदा को एक श्रद्धालु अपने कंधे पर रखकर पैदल चलता है। जब वह थक जाता है तो दूसरा यात्री गदा अपने कंधे पर ले लेता है और यात्रा आगे बढ़ती रहती है। इसी तरह श्रद्धालु बारी-बारी से गदा को कंधे पर लेकर बागेश्वर धाम की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
यात्रा में करीब 51 पदयात्री शामिल हैं। यात्रा संयोजक राजू पंडित, ओमप्रकाश पाटीदार, गणेश पाटीदार और सुनील वैरागी के नेतृत्व में श्री गणेश मित्र मंडली के सदस्य अरविंद, विजय, दीपक, हरिओम, विमल, कृष्णा, सुरेश वैरागी, माधव, मनीष, आयुष, नरेंद्र सिसोदिया, दीपक तिवारी सहित अन्य श्रद्धालु पदयात्रा में शामिल हैं।

चौथे वर्ष भी जारी है धार्मिक और राष्ट्रभक्ति का संदेश
आयोजकों के अनुसार यह पदयात्रा लगातार चौथे वर्ष निकाली जा रही है। यात्रा के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार, सनातन धर्म के प्रति जागरूकता, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों का संवर्धन तथा समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भावना विकसित करने का संदेश दिया जा रहा है।
पदयात्रा जैसे-जैसे गांवों और कस्बों से होकर आगे बढ़ रही है, जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा यात्रा का स्वागत किया जा रहा है। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन के साथ गदा लेकर पैदल चल रहे श्रद्धालु लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पदयात्रियों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना ही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है।