शनिवार से सोमवार तक डॉक्टर की अनुपस्थिति से मरीज परेशान, 35-40 गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं होने से महीनों से अटके जन्म प्रमाण पत्र
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
।सांची विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीवानगंज में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ग्रामीणों की परेशानी सामने आई है। शनिवार से सोमवार तक डॉक्टर के उपलब्ध नहीं रहने के कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा और कुछ मरीज बिना उपचार के ही वापस लौट गए। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के करीब 35 से 40 गांवों के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर हैं। मौसमी बीमारियों के चलते इन दिनों मरीजों की संख्या भी बढ़ी हुई है। ऐसे में डॉक्टर के उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार को भी डॉक्टर का इंतजार करते रहे मरीज
सोमवार को अंबाड़ी निवासी बुजुर्ग पूरन साहू, फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज निवासी लालजी प्रजापति, रामकिशन सेन और सेजल साहू इलाज कराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। मरीजों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थीं, जिसके चलते उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीज अस्पताल के बाहर बैठकर डॉक्टर के आने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचीं और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार डॉक्टर की तबीयत खराब होने के कारण वह अवकाश पर हैं।
ग्रामीण अरुण सेन, वीरेंद्र मीणा, मूलचंद विश्वकर्मा, चंगू पाटकर और हरि साहू का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक डॉक्टर पलक पटेरिया पदस्थ हैं। ऐसे में उनके किसी कारण से अनुपस्थित रहने पर मरीजों के उपचार की व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। ग्रामीणों ने अस्पताल में कम से कम दो डॉक्टरों की पदस्थापना की मांग की है, ताकि एक डॉक्टर के अवकाश पर रहने की स्थिति में दूसरे डॉक्टर से मरीजों का उपचार कराया जा सके।
ग्रामीणों ने रात के समय भी डॉक्टर की उपलब्धता की मांग उठाई है। उनका कहना है कि रात में किसी दुर्घटना या गंभीर स्थिति में घायल व्यक्ति को उपचार के लिए सांची अस्पताल ले जाना पड़ता है।

पांच महीने से जन्म प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा परिवार
स्वास्थ्य केंद्र में केवल उपचार व्यवस्था ही नहीं, बल्कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर भी ग्रामीण परेशान हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय स्तर पर जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित काम प्रभावित हो रहा है। आसपास के करीब 30 गांवों के लोग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं।
सोमवार को भारतीपुर निवासी अमर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी का जन्म करीब पांच महीने पहले हुआ था, लेकिन अभी तक जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि वह करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल आते हैं और हर बार प्रमाण पत्र नहीं बनने की जानकारी देकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है।
अमर सिंह के मुताबिक वह अब तक करीब 10 बार अस्पताल के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पाया है।
रायसेन में 1000 से अधिक प्रमाण पत्र लंबित
जन्म प्रमाण पत्र में हो रही देरी को लेकर अस्पताल कर्मचारियों से जानकारी लेने पर बताया गया कि डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र रायसेन जिले से जारी होते हैं। स्थानीय स्तर से आवेदन तैयार कर भेजे जाते हैं, लेकिन जिले से प्रमाण पत्र जारी होने में देरी हो रही है।
रायसेन स्तर पर इस संबंध में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र का पोर्टल करीब 20 दिनों तक बंद था, जो अब चालू हो गया है। उनके अनुसार जिले में 1000 से अधिक जन्म प्रमाण पत्र लंबित हैं। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 100 प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। लंबित आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण सभी प्रमाण पत्र जारी करने में समय लग रहा है।
जल्द होगी नए कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था : बीएमओ
इस मामले में सांची बीएमओ लक्ष्मी कुमार ने बताया कि दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं होने के कारण दो फार्मासिस्टों को जिम्मेदारी दी गई है। यदि वे ऑपरेटर का काम नहीं कर पा रहे हैं तो कुछ दिनों में नए कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था की जाएगी और फार्मासिस्टों को सांची बुलाया जाएगा।
बीएमओ ने कहा कि व्यवस्था में सुधार का प्रयास किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को जन्म प्रमाण पत्र सहित अन्य कार्यों के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़ें।
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र पर बड़ी आबादी निर्भर है, इसलिए डॉक्टर की नियमित उपलब्धता और जन्म प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक सेवाओं की सुचारु व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जानी चाहिए।