चारे के संकट के साथ हादसों का भी बढ़ा खतरा, कई थाना क्षेत्रों से गुजर रहे वाहन; एक दिन की कार्रवाई के बाद फिर शुरू हुआ धड़ल्ले से परिवहन
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर इन दिनों भूसे से भरे ओवरलोड वाहनों का खुलेआम परिवहन जारी है। प्रतिदिन करीब 50 से 60 ट्रक, डंपर, मिनी ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भूसा लेकर हाईवे से गुजर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि ये वाहन सुखी सेवनिया, दीवानगंज चौकी, सांची और सलामतपुर थाना क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, इसके बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही हरे चारे की कमी बनी हुई है। ऐसे में बड़ी मात्रा में भूसा दूसरे क्षेत्रों में भेजे जाने से आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे का संकट और गहरा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक बिचौलिए किसानों से करीब 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल में भूसा खरीदकर दूसरे जिलों और राज्यों में 800 से 1000 रुपए प्रति क्विंटल तक बेच रहे हैं।

क्षमता से दोगुना तक भूसा, सड़क पर मंडरा रहा हादसे का खतरा
भूसे के परिवहन में नियमों की अनदेखी का आरोप भी सामने आ रहा है। कई पिकअप और छोटे मालवाहक वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक भूसा लादा जा रहा है। जहां करीब 15 क्विंटल क्षमता वाले वाहन में 30 क्विंटल तक भूसा लादे जाने की बात सामने आ रही है। कई वाहनों में भूसा बॉडी से कई फीट बाहर तक निकला रहता है।इससे पीछे चलने वाले वाहन चालकों को सड़क का दृश्य साफ दिखाई नहीं देता। अचानक ब्रेक लगाने या वाहन के संतुलन बिगड़ने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। भूसे से भरेट्रैकों के कारण कई वाहन दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
कुछ दिन पहले भूसे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्राले ने मारी थी टक्कर
ओवरलोड वाहनों से पैदा हो रहे खतरे का उदाहरण कुछ दिन पहले दीवानगंज के पास चंद्रा गार्डन के समीप देखने को मिला था यहां भूसे से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को तेज रफ्तार ट्राले ने टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर सड़क से नीचे उतर गया और उसके आगे के दोनों पहिए निकल गए। गनीमत रही कि चालक की जान बच गई।हादसे के बाद ट्राला चालक मौके से फरार हो गया था, जिसे करीब दो किलोमीटर दूर जाकर पकड़ा गया।
एक दिन हुई कार्रवाई, फिर लौट आया वही नजारा
कुछ दिन पूर्व रायसेन एसडीएम द्वारा हाईवे-18 पर भूसे से भरे ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई एक दिन तक ही सीमित रही। इसके बाद हाईवे पर फिर से भूसे से भरे वाहन पहले की तरह दौड़ने लगे हैं।
ग्रामीणों ने उठाए निगरानी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईवे पर रोजाना दर्जनों ओवरलोड वाहन गुजर रहे हैं तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने हाईवे पर सघन जांच अभियान चलाने, ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करने और भूसे के परिवहन से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भूसे के खुले परिवहन और ओवरलोड वाहनों पर कब तक प्रभावी रोक लगाता है, या फिर हाईवे-18 पर यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।