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सतपुड़ा की पर्वत शृंखलाओं से घिरे जंगल में 25 प्रजाति के सांप सर्पमित्र से जाने काटने पर क्या करें

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सारणी। सतपुड़ा की पर्वत शृंखलाओं से घिरे बैतूल जिले के जंगल में 25 प्रजाति के सांपों की मौजूदगी अब तक सामने आई है। सबसे अधिक सांप जिले के सारणी शहर के आसपास के जंगल में मौजूद होने का दावा सर्पमित्र आदिल खान ने किया है। सारणी शहर सतपुड़ा मेलघाट टाइगर कारिडोर से सटा हुआ है और चारों ओर से सतपुड़ा के घने जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है। इस वजह से यहां समृद्ध जैव विविधता मौजूद है।

पर्यावरणविद् व सांपों के संरक्षण का कार्य कर रहे आदिल ने बताया कि बैतूल जिले की सारणी रेंज में अब तक 22 प्रजाति के सांपों का रेस्क्यू किया है और तीन अन्य प्रजातियों के सांप उन्हें जंगल में मौजूद मिले हैं। इनमें ग्रीन वाइन स्नेक, एरो हेडेड ट्रींकेट स्नेक और एलियट्स शिल्ड टेल्ड स्नेक शामिल हैं।

विश्व सर्प दिवस के मौके पर उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बैतूल जिले में चार विषैली प्रजाति के सांप अधिक संख्या में मौजूद हैं। जिसमें कोबरा, सा-स्केल्ड वाइपर, रसेल्स वाइपर और करैत सांप शामिल हैं। विषैले सांपों में बेंबू पिट वाइपर सांप भी शामिल है, जो अमूमन बैतूल के घने जंगलों में ही मिलता है। कम विषैले सांपों में केट स्नेक, फार्सटन केट स्नेक, ग्रीन वाइन स्नेक शामिल हैं। इसके अलावा विषहीन सांपों में धामन, ब्रोंज बेक ट्री स्नेक, अजगर, पानी वाला सांप भी जिले के जंगलों में मौजूद हैं।

सांप काटने पर क्या करें

सर्पमित्र आदिल ने बताया कि सांप काटने पर झाड़ फूंक बिल्कुल ना करवाएं। सांप के काटते ही संभव हो तो उसकी तस्वीर लें और बिना समय गंवाए नजदीक अस्पताल पहुंचे। जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है उसे चलाएं फिराएं नहीं, क्योंकि सांप का जहर खून के साथ ही शरीर में फैलता है। अगर चलेंगे-फिरेंगे या ज्यादा मानसिक तनाव लेंगे तो रक्तचाप बढ़ेगा, जिससे शरीर में तेजी से जहर फैलेगा, इसलिए गाड़ी या एंबुलेंस से व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने को प्राथमिकता दी जाए। जहां सांप ने काटा हो उसके ऊपर के हिस्से में हल्का टाईट कपड़ा बांध लें।

80 प्रतिशत सांप नहीं होते जहरीले

आदिल का दावा है कि लगभग 80 फीसद सांप जहरीले नहीं होते हैं। जिस वजह से झाड़ फूंक करने पर बिना चिकित्सकीय इलाज के ठीक होने पर लोगों का अंधविश्वास झाड़-फूंक के प्रति बढ़ जाता है। जबकि अस्पताल में भी बिना जहर वाले सांप के काटने पर प्राथमिक इलाज ही दिया जाता है। वहीं जिसे जहरीले सांप ने काटा हो उसकी झाड़-फूंक करवाते हुए मृत्यु हो जाती है, क्योंकि जहरीले सांप के काटने पर अस्पताल में इलाज करवाने पर ही जान बच सकती है। झाड़ फूंक करना मैजिक एंड ब्लेक रेमेडीज एक्ट का उल्लंघन भी है।

इन वजहों से घर में आ जाते हैं सांप

यह देखने में आया है कि जिन घरों में चूहे और मेंढक आते हैं वहीं सांप भी आते हैं, क्योंकि यह दोनों ही सांपों के मुख्य भोजन में शामिल हैं, इसलिए लोगों को चाहिए कि अपने घरों में चूहे के आने के रास्ते बंद करें और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। बारिश के समय घरों के आसपास की सफाई करवाएं और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। घर के खिड़की दरवाजों में जाली लगाकर रखें, जिससे सांप घरों के अंदर ना आ पाएं।

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