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शिक्षा विभाग के मौन समर्थन से निजी स्कूल खुलेआम बेंच रहे ड्रेस किताब कॉपियां

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हर साल धंधा चलाने रंग में कर रहे बदलाव

  सुरेंद्र जैन धरसीवा

धरसीवा क्षेत्र के सांकरा धनेली सिलतरा मुख्यालय धरसीवा सहित पूरे क्षेत्र में निजी स्कूल शिक्षा विभाग के मौन समर्थन से खुलेआम स्कूल से ही ड्रेस किताब कॉपियां मनमाने रेट पर बेच रहे हैं इतना ही नहीं हर साल अपना लाखों का अवैध कारोबार चलाने कुछ न कुछ ड्रेस के कलर में बदलाव किया जा रहा है

जानकारी के मुताबिक सांकरा सिलतरा से लेकर धरसीवा सिलयारी तक ग्रामीण अंचलों में दर्जनों छोटे बड़े निजी स्कूल हैं पालक अच्छी पढ़ाई के लिए अपने बच्चो को इन निजी स्कूलों में भर्ती कराते हैं लेकिन एडमिशन के साथ ही स्कूलों से उन्हें ड्रेस मोजे बेल्ट आई कार्ड डायरी किताब कॉपियां पेन जूता आदि जोड़कर बता दिया जाता है और पूरा पेमेंट लेकर ही एडमिशन देते हैं यह सिलसिला वर्षों से बेरोकटोक जारी है ।

स्कूल से सस्ती बाजार में लेकिन महंगा खरीदना मजबूरी

स्कूल संचालकों द्वारा स्कूलों से बेचीं जा रही ड्रेस मोजा बेल्ट टाई जूता किताब कॉपियां आदि जिस रेट में स्कूलों से दी जा रही उससे आधे दाम पर वही सब बाजार की दुकानों में मिल जाते हैं बाबजूद उन्हें स्कूल से ही लेने मजबूर किया जाता है पालक भी यह सोचकर विरोध नहीं कर पाते कि कहीं उनके बच्चे को फेल न कर दें बच्चों को पढ़ाना सभी पालकों की मजबूरी है उसी का लाभ निजी स्कूल संचालक उठा रहे हैं।

बाजार से कपड़ा लेकर बनवाया हुआ नहीं चलेगा

निजी स्कूलों की मनमानी का आलम ये है कि कोई पालक बाजार से कपड़ा खरीदकर यदि अपने बच्चो को उनके नाप की ड्रेस ट्रेलर्स से सिलवा ले तो उस ड्रेस को स्कूल संचालक अमान्य कर देते हैं ड्रेस में स्कूल का मोनो नहीं ये नहीं चलेगी कहकर अपने स्कूल से ड्रेस बेचते हैं

हर साल धंधा चलाने कुछ न कुछ बदलाव

निजी स्कूल संचालक अपना लाखों का धंधा हर साल चलाने कुछ न कुछ ड्रेस में बदलाव करते रहते हैं हल्का कलर चेंज करते रहते हैं और मनमाने रेट पर बेचते रहते हैं

कुछ स्कूल दुकानों में रखवाये ड्रेस

क्षेत्र के कुछ निजी स्कूल संचालक इतने चतुर हैं कि वह थोक में ड्रेस बनवाकर अपना रेट फिक्स कर अपने खास की दुकानों में ड्रेस रखवाकर वहां से पालकों को दिलवाते हैं दुकानदार को पचास से सौ रुपए तक कमिशन देते हैं

जानकर अंजान बना शिक्षा विभाग

ऐसा नहीं कि शिक्षा विभाग वीईओ कार्यालय या सीईओ कार्यालय को इसकी जानकारी न हो बीइओ कार्यालय से लेकर जिला शिक्षा कार्यालय तक सभी जानते हैं कि किस निजी स्कूल में ये अवैध धंधा चल रहा लेकिन अफसोस की वो कार्यवाही करने के बजाय मौन समर्थन दिए हुए हैं

सरकार को हर साल लगता है करोड़ो का चूना

धरसीवा ही नहीं अपितु प्रदेशभर में निजी स्कूल स्कूल कम ड्रेस मोजा जूता बेल्ट किताब कॉपियां पेन आदि की दुकान अधिक नजर आते हैं लेकिन ये सब अवैध रूप से काम होता है जिससे सरकार को प्रदेशभर में हर साल करोड़ों का चूना लगता है

कारण ये कि स्कूल संचालक कच्चे में थोक में थान का ड्रेस का कपड़ा मंगाते हैं और थोक में अपने फिक्स ट्रेलर से सस्ते में सिलवाते हैं और फिर कच्चे में ही मनमाने रेट पर स्कूलों से पालकों को बच्चो को ड्रेस आदि बेंच देते हैं इससे सरकार को हर साल करोड़ों का टैक्स का चूना भी स्कूल संचालक लगाते हैं

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