मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज ,अंबाडी , सेमरा ,बालमपुर, सत्ती, बांसिया, पिपरई, मुनारा, हिनोतिया ,भंवर खेड़ी ,जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर ,नरखेड़ा, सरार, कयामपुर ,संग्रामपुर सहित अन्य कई गांवों कस्बों गणेश उत्सव का मनाया जा रहा है तो वहीं क्षेत्र की महिलाओं द्वारा गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी और शुक्रवार को संतान साते का व्रत रख पूजा पाठ का आयोजन किया गया।
भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी और अनंत सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। महिलाओं ने अपने घर पर संतान साते का व्रत रखकर भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की।
पंडित चंद्र मोहन तिवारी ने महिलाओं को कथा सुनाते बताया कि भगवान सूर्य की अष्टदल बनाकर महिलाओं ने नकी पूजा की।
भगवान को घी का दीप , लाल फूल, लाल कनेर का फूल , गुड़ और आटे का प्रसाद बनाकर भगवान सूर्य को अर्पित किया। सूर्य देव की पूजा में कई महिलाओं ने लाल वस्त्र धारण किए हुए थे। आगे कहा कि संतान सप्तमी व्रत संतान सुख प्रदान करने वाला व्रत है। इस व्रत से संतान को आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने एक बार पांडु पुत्र युधिष्ठिर को भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के महत्व को बताते हुए कहा था कि इस दिन व्रत करके सूर्य देव और लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से संतान की प्रप्ति होती है। आगे बताया कि जब माता देवकी के पुत्रों को कंस जन्म लेते ही मार देता था। लोमश ऋषि ने माता देवकी को तब संतान सप्तमी व्रत के बारे में बताया। माता ने इस व्रत को रखा और लोमश ऋषि के बताए विधान के अनुसार माता ने इस व्रत के नियम का पालन किया था।