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विकसित अभियांत्रिकी का उदाहरण पेश करता सीढ़ीदार कुंआ

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रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह

दमोह जिले में प्राचीन काल से स्थापत्य के उच्चतम प्रमाण देखने को मिलते रहे है जो एक तरह से विकसित अभि यांत्रिकी का उदाहरण भी है, पूर्व के समय के कुएं,बावड़ी,तालाब वर्तमान में उपलब्ध है।
जल वितरण और भंडारण के लिए भी योजना बद्ध कार्य दिखाई देते है,जो बहुत ही व्यवस्थित बनाए गए। अगर जल का अभाव हो जाए तो तालाब,नदी के समीप भी कुएं बनाए गए।इससे स्पष्ट होता है कि तत्कालीन स्थापत्य कला में जन साधारण के हित को विशेष प्रोत्साहित किया गया ।


कुएं बावड़ी बनाते समय सोपानों की व्यवस्था की गई जो ऊपर से बड़े आकार में निर्मित होकर नीचे कूप आकार के हो गए।सीढ़ियों को बहुत ही रोचक ढंग से बनाया गया इसमें आज भी जल स्रोत उपलब्ध है।
इसी तरह का उत्कृष्ट कार्य ग्राम झरौली में दिखाई देता है जहां काफी प्राचीन समय में बना कुंआ आज भी यथावत है और इसमें पानी भी है,इसका निर्माण भी बहुत सुंदर तरीके से किया गया है जिसके चारों ओर सीढ़िया बनी हुई है जो गोलाकार में नीचे तक जाती है,ग्रामीणों का कहना है कि ये प्राचीन बैहर है और धरोहर भी है।

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