सागर । आचार्य श्री समय सागर महाराज के आशीर्वाद से मुनिश्री महासागर महाराज के सानिध्य में भाग्योदय तीर्थ में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज (दक्षिण) के शिष्य मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज (63 वर्ष) की संलेखना समाधि 12 अप्रैल से प्रारंभ हो गई है। मुनिश्री कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे है और कई महीनो से व्हीलचेयर पर बिहार चल रहा था वे मूलतः ग्रहस्थ अवस्था में नगर के रामपुरा वार्ड के निवासी हैं।
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि महासागर महाराज के सानिध्य में प्रारंभ हुई संलेखना के पहले दिन निर्जल उपवास किया दूसरे दिन लौकी का जूस और जल लिया तीसरे दिन पुनः उपवास किया धीरे-धीरे सभी प्रकार के रसो का त्याग बढ़ता जाएगा मुनि श्री महासागर महाराज करेली की ओर बिहार कर रहे थे आचार्य श्री समय सागर महाराज के आशीर्वाद और संकेत मिलने के बाद 50 किमी से वापस विहार कर भाग्योदय तीर्थ सागर पहुंचे।
63 वर्षीय मुनि श्री निर्दोष सागर महाराज का गृहस्थ अवस्था का नाम संतोष जैन था कक्षा नवमी तक शिक्षित 5 भाई बहनों में सबसे बड़े थे और बर्तन का व्यवसाय करते थे 1998 में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दो प्रतिमा के व्रत लिए थे और हमेशा गुरु चरणों में परिवार सहित रहकर चौका लगाकर आहार कराया करते थे 7 जुलाई 2006 से उन्होंने व्यापार का त्याग कर दिया जनवरी 2008 में उनकी दोनों किडनी खराब हो गई डॉक्टर ने जवाब दे दिया तो आचार्य श्री ने उन्हें चारों प्रकार का आहार का त्याग कराते हुए आशीर्वाद दिया और सात प्रतिमा के व्रत ले लिए 12 फरवरी 2021 को परिवार का त्याग कर गुना में आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज (दक्षिण) से मुनि दीक्षा ग्रहण की पहले चातुर्मास में ही लकवा ग्रस्त होने से अस्वस्थ रहने लगे और उसके पश्चात आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर महाराज के साथ उन्होंने दो चातुर्मास व्यतीत किये। फरवरी 2026 से सागर में विराजमान है प्रतिदिन सैकड़ो लोग उनके दर्शन करने के लिए भाग्योदय तीर्थ पहुंच रहे हैं। पूर्व में सागर में मुनि श्री क्षमा सागर महाराज और मुनि श्री भव्य सागर महाराज की समाधि हो चुकी है। प्रतिदिन सैकड़ो लोग मुनि श्री के दर्शन करने के लिए भाग्योदय तीर्थ पहुंच रहे हैं।