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बेसर में तेंदुए का हमला, गाय के बछड़े को बनाया शिकार, ग्रामीणों में दहशत

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– बाघ-तेंदुए के बढ़ते हमलों पर वन विभाग से रेस्क्यू की मांग

मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत शाहपुर के गांव बेसर कॉलोनी में रविवार तड़के तेंदुए ने एक बार फिर दस्तक देकर ग्रामीणों में दहशत फैला दी। देर रात  नवल सिंह पिता इमरत सिंह की गाय का बछड़ा, जो सार (बाड़े) में बंधा था, तेंदुए का शिकार बन गया। सुबह जब परिवार ने देखा तो बछड़ा गायब था। तलाश करने पर घर से कुछ दूरी पर उसका शव मिला, जिसे तेंदुआ बुरी तरह नोचकर खा चुका था।

ग्रामीणों का कहना है कि बेसर कॉलोनी में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी तेंदुआ कई मवेशियों का शिकार कर चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

तीन दिन पहले मादा गांव में बाघ ने किया था हमला

बेसर की घटना से महज तीन दिन पहले मादा गांव में भी बाघ ने एक पड़िया का शिकार किया था। लगातार हो रहे हमलों से साफ है कि बाघ और तेंदुए की गतिविधियां अब आबादी वाले इलाकों तक पहुंच चुकी हैं। पशुपालकों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

तीन दर्जन से अधिक मवेशी बने शिकार

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बाघ और तेंदुए अब तक तीन दर्जन से अधिक मवेशियों का शिकार कर चुके हैं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से केवल निगरानी और समझाइश तक ही कार्रवाई सीमित है। लोगों ने मांग की है कि वन्य जीवों का जल्द रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाए, ताकि जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, जारी की एडवाइजरी

घटनाओं के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि रात में अकेले बाहर न निकलें, पशुओं को मजबूत और सुरक्षित स्थान पर बांधें तथा वन क्षेत्र के आसपास विशेष सतर्कता बरतें।

कलेक्टर पहले ही जारी कर चुके हैं दिशा-निर्देश

रायसेन कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पूर्व में ही दीवानगंज वन परिक्षेत्र में बाघ की लगातार मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें ग्रामीणों को रात में अकेले बाहर नहीं निकलने, समूह में रहने, बच्चों को अकेले स्कूल नहीं भेजने तथा पालतू पशुओं को वन क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई थी।

वन विभाग के अनुसार दीवानगंज वन वृत्त के आसपास करीब 20 किलोमीटर की परिधि में बाघ की लगातार मूवमेंट दर्ज की जा रही है। जनहानि रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

भय के साये में कई गांव

बाघ और तेंदुए की लगातार बढ़ती गतिविधियों के कारण मादा, दीवानगंज, अंबाडी, कयामपुर, संग्रामपुर, कुलहड़िया, नरखेड़ा, बेसर सहित आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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