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सांँची विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ का निधन; अकादमिक जगत में शोक की लहर

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रायसेन /भोपाल।  साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलगुरु और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात बौद्ध विद्वान प्रो. वैद्यनाथ लाभ का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज भोपाल के सुभाष विश्राम घाट पर किया गया। 15 अक्टूबर 1957 को जन्मे प्रो. लाभ दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के प्रथम बैच के छात्र थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन बौद्ध दर्शन के संवर्धन में समर्पित कर दिया। बौद्ध दर्शन और पालि साहित्य पर उन्होंने 24 से अधिक पुस्तकें संपादित की हैं और 90 से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित किए हैं।
2022 में सांची विश्वविद्यालय का कार्यभार संभालने से पूर्व प्रो. लाभ 2018 में नवनालंदा महाविहार के पहले नियमित कुलपति नियुक्त हुए थे। उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन विभाग की स्थापना की और सन 2000 में इंडियन सोसायटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज (ISBS) की नींव रखी। प्रो लाभ अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के उपाध्यक्ष भी रहे। उनके परिवार में पत्नी और पुत्र हैं। उनके निधन पर देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने शोक संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।

विवि के कुलाधिपति आचार्य प्रो. यज्ञेश्वर एस. शास्त्री ने प्रो. लाभ के निधन को अपनी ‘निजी क्षति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने प्रो. लाभ को याद करते हुए कहा, “वे एक विशिष्ट विद्वान होने के साथ-साथ अत्यंत सरल और सहृदय इंसान थे।”

अतिरिक्त मुख्य सचिव (संस्कृति) श्री शिवशेखर शुक्ला ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “प्रो. लाभ का निधन विश्वविद्यालय परिवार और संपूर्ण अकादमिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे सांची विश्वविद्यालय की आत्मा थे और भारतीय ज्ञान परंपरा के सच्चे संवाहक थे।”

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. रामनिवास गुप्ता ने भी अपने शोक संदेश में कहा कि प्रो. लाभ का जाना विश्वविद्यालय परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

प्रो. लाभ की प्रमुख कृतियों का विवरण उनके गहन शोध और विद्वता का प्रमाण है।Paññā in Early Buddhism: यह उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक है, जो उनके शोध कार्य ‘Paññā: A Philosophical Analysis with Special Reference to Visuddhimagga’ पर आधारित है और 1991 में प्रकाशित हुई थी।

The Ocean of Buddhist Wisdom नामक महत्वपूर्ण श्रृंखला के प्रो. लाभ संपादक रहे हैं, जिसके अब तक 11 से अधिक खंड प्रकाशित हो चुके हैं।
Bauddha Pramana Mimansa: बौद्ध तर्कशास्त्र और ज्ञानमीमांसा पर उनके लेख और संपादन कार्य इस विषय में मील का पत्थर माने जाते हैं।

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