दीवानगंज–देहरी पूछी के पहाड़ों में धधकती आग, जंगल की ओर बढ़ा खतरा , एक महीने में सातवीं घटना, फायर ब्रिगेड न होने से हालात बेकाबू
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देहरी पूछी और आसपास के पहाड़ी इलाकों में पिछले कई दिनों से आग सुलग रही है, जो अब धीरे-धीरे विकराल रूप लेते हुए जंगल की ओर बढ़ती जा रही है। दूर-दूर तक पहाड़ों से उठता धुआं साफ देखा जा सकता है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है।
जानकारी के मुताबिक, इस आग की चपेट में आकर जंगल में मौजूद छोटे-छोटे पेड़-पौधे ,जीव, जंतु जलकर नष्ट हो रहे हैं। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया, तो यह बड़े वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है।
चिंताजनक बात यह है कि दीवानगंज क्षेत्र में पिछले एक महीने के अंदर यह आगजनी की सातवीं घटना है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की सुविधा का अभाव समस्या को और गंभीर बना रहा है। 2 दिन पहले भी
ग्राम अंबाडी गांव इंदिरा आवास कॉलोनी के पीछे स्थित पहाड़ पर देर रात अचानक आग लग गई थी आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और बिना किसी सरकारी मदद के खुद ही आग बुझाने में जुट गए। ग्रामीण अपने घरों से बाल्टियां और कुप्पियां लेकर पानी भर-भरकर लाते रहे और देर रात तक कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो यह आग इंदिरा आवास कॉलोनी तक पहुंच सकती थी, जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।
कुछ दिन पहले भी इसी पहाड़ पर देर शाम आग लग गई थी जिसको ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मचारियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। समय पर भी ग्रामीणों ने अपने घरों और टैंकरों से पानी लाकर आग बुझाई थी। 1 महीने के अंदर ही अंबाडी के पहाड़ पर यह आगजनी की दूसरी घटना हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से दीवानगंज में फायर ब्रिगेड की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन, हर साल आगजनी की घटनाओं में किसानों की कई एकड़ फसल और जंगल का बड़ा हिस्सा जलकर राख हो जाता है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब भी प्रशासनिक स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक दीवानगंज क्षेत्र आग की लपटों में जलता रहेगा और जिम्मेदार कब जागेंगे।