मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
इस वर्ष 27 अगस्त से गणेश उत्सव प्रारंभ होने जा रहा हैं इसकी तैयारियों के लिए नगर की सभी गणेश उत्सव समितियां जुटी हुई हैं। प्रतिमाओं को भी मूर्तिकार अंतिम रूप देने में लगे हैं। इस बार 5 फीट से लेकर 7 फीट तक की प्रतिमाएं बनाई गई है मूर्ति कलाकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा प्रजापति समाज को मिट्टी नहीं उपलब्ध कराई जाती। मजबूरी में मिट्टी खरीद कर प्रतिमाएं बनाना पड़ रही है। जरूरी है कि प्रतिमाएं बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन मिटटी उपलब्ध कराए ताकि हमें खरीदना न पड़े। इस बार प्रतिमाओं की कीमतों में 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी की कीमत के साथ ही लकड़ी, रंग रोगन सहित अन्य सामग्री के दाम भी काफी बढ़ने से दाम में बढ़ौतरी हुई है। अंबाड़ी निवासी हल्के राम प्रजापति, अमन प्रजापति ,राहुल प्रजापति ,विक्की ,छोटू प्रजापति ने बताया कि हमारा पूरा परिवार कई वर्षों से गणेश जी, दुर्गा जी, लक्ष्मी जी सहित अन्य भगवान की मूर्ति बनाने का कार्य पिछले कई सालों से कर रहे हैं। हमारे पूर्वज भी यही काम करते थे इसके बाद हम करने लगे मूर्ति करीब दो माह में बनकर तैयार होती है। मूर्तियों को तैयार करने में कारीगरों की बहुत मेहनत लगती है तब जाकर मूर्ति तैयार होती है गणेश जी का पूरा दरबार कच्ची मिट्टी की मूर्तियों से ही सजाया जाता है। अंबाडी निवासी हल्के राम प्रजापति ने बताया कि हम जो मूर्ति बनाते हैं वह मूर्ति बालमपुर, भदभदा, दीवानगंज, सेमरा ,नरखेड़ा, जमुनिया, कायमपुर, बेरखेड़ी, सलामतपुर गीदगढ़, महुआ खेड़ा, हिनोतिया, शक्ति, पिपरई, मुनारा, करेया, कायमपुर, जमुनिया ,देहरी, मुड़िया खेड़ा बांसिया यदि गांव में जाती हैं अंबाड़ी गांव मिट्टी की मूर्ति बनाने में प्रसिद्ध है यहां के ग्रामीण जिस तरह की मूर्ति बनाने की कहोगे उस तरह की मूर्ति बना देते हैं यहां कई वर्षों से काम चलता है अंबाडी के निवासी पूरी साल मूर्ति बनाने का कार्य करते हैं दीपावली पर लक्ष्मी जी, गणेश उत्सव में गणेश जी की मूर्ति बनाते हैं तो नवरात्र में दुर्गा जी की मूर्ति बनाते हैं जब कोई व्यक्ति विशेष तौर पर नई मूर्ति बनाने को कहता है तो हम उस हिसाब से मूर्ति बनाते हैं जैसी कहते हैं वैसे भी मूर्ति बना देते हैं।