सिंगरौली। एक तरफ देश में अमृत महोत्सव मन रहा है तो वहीं सिंगरौली जिले में लो कोयला युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। जब की पूरे देश में अमृत नल जल योजना व्यापक पैमाने पर काम कर रही तो दूसरी तरफ उद्योगिक इकाइयों की मनमानी से की डांस झेल रहे। अनुसूचित जन जाति के लोग देश की मिनीरत्न कंपनी में से एक एन सी एल पिछले कई सालों से इस क्षेत्र की पहाड़ियों से कोल खनन कर रही है। इससे एन सी एल के साथ-साथ सरकार को भी अच्छी आमदनी हो रही है। इस क्षेत्र के आदिवासी बैगा समाज के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए पिछले कई वर्षो से जूझ रहे हैं । इनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। कोयले की काली राख व प्रदूषण के दंश से जहां लोग परेशान हैं वही जिले के एन सी एल दूधिचुआ प्रोजेक्ट खदान के आसपास मौजूद करीब 400 के आदिवासी बैगा समाज के लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।
जयंत गोलाई बस्ती के सैकड़ों आदिवासी पिछले कई सालों से बलिया नाला के गंदे पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हैंडपंप के लिए कई बार गुहार लगाने के बावजूद भी उनकी एक भी सुनवाई नहीं हुई. लिहाजा सैकड़ों रहवासी इस गंदे पानी को पीकर मजबूरी में अपनी जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.और इलाके के रहवासी कई बीमारियों की चपेट में है ।
सिंगरौली जिला कोयले की खदानों का धरती पर बड़े भंडारों में से एक है। जब आप उर्जाधानी सिंगरौली जिले का दौरा करेंगे तो आपको सड़क के किनारे दूर-दूर तक कोयले की खदानें नजर आएंगी। प्रत्येक व्यक्ति का चेहरे किसी कपड़े से ढंका हुआ नजर आएगा।
वह लोग इसी पानी से कपड़ा धोती है नहाती है और पानी पीती है, स्वच्छ पानी के अभाव में उन्हें और उनके बच्चों को वही पानी पीना पड़ता है। बता दें कि कोयला खनन करने वाली कंपनी एनसीएल से यहां के लोगों को स्वच्छ पानी प्रदान करने के लिए कहा गया है, लेकिन एनसीएल को केवल खनन से मतलब है लोगों की जिंदगी से नहीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि खनन कंपनी उनके साथ स्वच्छ पानी मुहैया कराने का करार करती हैं, लेकिन उसपर अमल नहीं करतीं और हमें हमारे हालात पर छोड़ जाती हैं।