ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में चल रहे जालसाजी से एमबीबीएस डिग्री निकलवाने के मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन का एक और कमाल सामने आया है। विश्वविद्यालय ने इस मामले में खानापूर्ति करने के लिए आउटसोर्स के चार कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया और अन्य पांच अधिकारियों कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। लेकिन इन सबके बीच विश्वविद्यालय उस व्यक्ति का नाम छुपा रहा है जिसने पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई हैै। यानी वह व्यक्ति जिसने आवेदन पर यह प्रमाणित करते हुए हस्ताक्षर किए थे कि वह आवेदन छात्रा को जानता हैै। उसके दस्तावेजों की जांच करने के बाद यह प्रमाणित करता है की वही प्रतीक्षा शर्मा है। यहां बता दें की जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी जिसके अध्यक्ष जीआरएमसी के डीन डॉक्टर अक्षय निगम है वह कमेटी मामले में जांच शुरू करेगी।
इस मामले की होगी जांच
वर्ष 2013 बैच की एमबीबीएस की छात्रा प्रतिमा शर्मा के नाम पर मालेगाव में नौकरी कर रही प्रतिमा दायमा हाल ही में कुछ दिन पहले गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में अपने दोस्त मोहम्मद शफीक के साथ कुछ दस्तावेज निकलवाने आई थी। लेकिन वहां मौजूद क्लर्क को इस पर शक हुआ उस क्लर्क ने प्रतिमा शर्मा के मामा को फोन करके सूचित किया। प्रतिमा के मामा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ झांसी रोड थाने में एफ आई आर दर्ज कराई। पुलिस ने पूछताछ के दौरान दोनों आरोपितों से कई सवाल जवाब किए जिसमें प्रतिमा दायमा ने बताया कि उसने कुछ समय पहले जीवाजी यूनिवर्सिटी से दस हजार रुपए देकर प्रतिमा शर्मा के नाम की डुप्लीकेट डिग्री 24 घंटे में निकलवाई थी। इसके बाद पुलिस ने विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को भी अपने शक के घेरे में ले लिया।
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