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 रीवा हादसे के बाद जैन समाज में आक्रोश, संत सुरक्षा नीति और उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

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 – गृह मंत्री से लेकर कलेक्टर तक सौंपा ज्ञापन,

– सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन

मध्यप्रदेश के रीवा जिले में विहाररत जैन साध्वी संघ के साथ हुए दर्दनाक हादसे में दो पूज्य आर्यिकाओं के निधन के बाद सकल दिगम्बर जैन समाज में गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त है। इस घटना को लेकर सकल दिगम्बर जैन समाज जिला रायसेन एवं पंचायत समिति गैरतगंज ने केंद्र और राज्य सरकार के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, संत सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की है।

ज्ञापन गृह मंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश, गृह मंत्री मध्यप्रदेश, कलेक्टर रायसेन, पुलिस अधीक्षक रीवा एवं पुलिस अधीक्षक रायसेन को संबोधित किया गया। ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गैरतगंज के माध्यम से प्रेषित किया गया।

जैन समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि रीवा में हुई यह घटना केवल सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत नहीं होती, बल्कि उपलब्ध वीडियो क्लिप, परिस्थितियों एवं तथ्यों के आधार पर समाज में गंभीर आशंका और चिंता का वातावरण बना हुआ है। समाज ने पूरे मामले की एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराने की मांग उठाई है।

ज्ञापन में मांग की गई कि घटना स्थल एवं उससे जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा दोषियों पर हत्या का प्रकरण दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में किसी सुनियोजित षड्यंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाए।

जैन समाज ने संतों की सुरक्षा के लिए तत्काल “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग भी की है। इसमें विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और हाईवे व भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

ज्ञापन में राष्ट्रीय स्तर पर पैदल विहार करने वाले साधु-संतों के लिए सुरक्षा गाइडलाइन एवं एसओपी बनाने की भी मांग रखी गई। समाज का कहना है कि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, वाहन अथवा सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते और पूर्णतः अहिंसक जीवन व्यतीत करते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

इसके साथ ही प्रशासन और समाज के बीच समन्वय तंत्र स्थापित करने, “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” बनाने तथा आपातकालीन संपर्क व्यवस्था विकसित करने की मांग भी उठाई गई।

ज्ञापन में कहा गया कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून एवं संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। समाज का उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य गण मौजूद थे।

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