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दिव्य चिंतन::2023 में समाजवाद के फोड़े-फुंसी से निकल रहा मवाद…2024 में राम भक्त करेंगे इलाज… हरीश मिश्र

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आलेख

हरीश मिश्र

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम आदर्शों के प्रतिनिधि हैं। पवित्र ग्रंथ श्री रामचरितमानस
भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। गोस्वामी तुलसीदास रचित इस ग्रंथ ने हमारे परिवारिक आदर्शों को बनाए रखने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है , उतनी किसी और धार्मिक ग्रंथ ने नहीं निभाई। इसलिए रामचरितमानस का अपमान करने वालों का विनाश निश्चित है।

विदुर ने दुर्योधन के जन्म समय महाराजा धृतराष्ट्र से कहा था ” केवल इसी एक पुत्र को त्याग दो। इसके त्याग से सौ पुत्रों की वृद्धि होगी और इसका त्याग न करने से सौ पुत्रों का नाश होगा।” लेकिन महाराजा धृतराष्ट्र पुत्रमोह में दुर्योधन को त्याग न सके और अपने वंश का नाश करा लिया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यदि अल्पमति स्वामी प्रसाद मौर्य को त्याग देते हैं तो समाजवादी पार्टी का विस्तार हो सकता है, नहीं तो पार्टी और अखिलेश का विनाश निश्चित है। ऐसा कहा जाता है जो समाज में फूट डाले और पापी हो, उसको साथ रखने से कुल का नाश होता है।

समाजवादी विचारधारा की मुलायम त्वचा पर फिर से फोड़े फुंसी निकल आए हैं, जैसे अस्सी , नब्बे के दशक में निकले थे। जिसका उपचार राम भक्तों ने साईकिल की हवा निकाल कर किया था। आज फिर इस फोड़े-फुंसी के कारण राष्ट्र की त्वचा में खुजली और जलन हो रही है। जो राष्ट्र की एकता अखंडता के लिए घातक हो सकती है।

यह मुलायम फोड़ा है अखिलेश और फुंसी है मौर्य। इस फोड़े फुंसी का उपचार डॉक्टर अनुसार सुई या चीरा लगाकर किया जा सकता है या देशी पद्धति में उपचार है। किरमिच की पत्तियों को नमक, मिर्ची में पीसकर मुलायम त्वचा, जहां फोड़ा फुंसी है, लगाएं। इससे राहत मिलेगी ।

यह निश्चित है कि सनातनी राम भक्त 2024 में समाजवादी लंका में आग जरुर लगाएंगे ।

सुप्रीम कोर्ट को इस नफ़रत के एजेंडे पर स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। चुनाव आयोग को समाज में नफ़रत फैलाने के आधार पर समाजवादी पार्टी की मान्यता रद्द करनी चाहिए। सरकार को इनकी अवैध सम्पत्ती जब्त करना चाहिए। यह तारण के अधिकारी हैं।

ये निकृष्ट व्यक्ति अपने राजनैतिक लाभ के लिए न जाने कितनी रातों में कितने ही बिस्तर बदल चुका है। वह भारत की आत्मा, आदर्श धर्म ग्रंथ रामचरित मानस पर अपनी जहरीली जिव्हा से विष उगल रहा है । इनके द्वारा किया गया यह श्री रामचरितमानस का अपमान घृणित कृत्य निंदनीय नहीं बल्कि दंडनीय है। संविधान अनुसार इनका स्थान अब कालकोठरी में हैं।

अल्पमति राजनेता कभी भी राष्ट्रहित, धर्म युक्त, वीरतापूर्ण आचरण नहीं करता। ऐसा राजनेता अल्पमति सलाहकारों को साथ रखता है। निरर्थक कलह करता है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यदि मौर्य को त्याग देते हैं तो समाजवादी पार्टी का विस्तार हो सकता है, नहीं तो समाजवादी पार्टी और अखिलेश का विनाश निश्चित है। बुद्धिमान मतदाता अल्पमति राजनेता से बहस नहीं करते, परिणाम बताएंगे, 2023 में समाजवाद के फोड़े-फुंसी से जो मवाद निकल रहा…2024 में राम भक्त उसका इलाज जरुर करेंगे।

लेखक – ( स्वतंत्र पत्रकार )
स्वर दूत क्रमांक ९५८४८१५७८१
तरंग संपर्क – harishmishr21@gmail.com

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