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आस्था, परंपरा और संस्कृति का संगम है जमुनिया, भैरव बाबा से ठाकुर बाबा तक गूंजती है श्रद्धा

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

सांची विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया अपनी धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति के लिए क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। भोपाल-विदिशा हाईवे-18 फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज से लगभग 3 किलोमीटर अंदर स्थित इस पंचायत के अंतर्गत जमुनिया, टपरा, खेड़ा और कयामपुर गांव आते हैं, जहां आज भी धार्मिक मान्यताएं और लोक परंपराएं जीवंत रूप में दिखाई देती हैं।

ग्राम जमुनिया के मध्य स्थित भैरव बाबा का विशाल मंदिर ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय लोगों का मानना है कि दिन की शुरुआत बाबा के दर्शन से करने पर कार्य सफल होते हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रतिदिन राम जानकी मंदिर और भैरव बाबा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

गांव में स्थित राम जानकी मंदिर भी धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां रामनवमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण राई नृत्य रहता है, जो बुंदेली लोक संस्कृति की अनूठी पहचान माना जाता है।

इसी पंचायत के अंतर्गत आने वाले कयामपुर गांव में स्थित ठाकुर बाबा का स्थान क्षेत्रभर में प्रसिद्ध है। यहां होली की भाई दूज पर विशेष धार्मिक आयोजन होता है। मान्यता है कि ठाकुर बाबा से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु राई नृत्य का आयोजन कर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। हर वर्ष यहां लगभग 15 से 20 राई दलों द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया , निनोद, बरजोरपुर, सरार, कयामपुर, संग्रामपुर, करैया, गिदगढ़, बालमपुर, देहरी, छोला, चांद पिपरिया, प्रेमपुरा, अनंतपुरा, दहीडा, लंबाखेड़ा, कचनारिया, खोह, बांसिया, हिनोतिया, टापरा, मुनारा, पिपरई, काली टोर,भंवर खेड़ी सहित 100 गांवों से ज्यादा के ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कयामपुर में हाल ही के वर्षों में निर्मित राम जानकी, हनुमान, शिव-पार्वती और राधा-कृष्ण के भव्य मंदिर भी लोगों की आस्था के केंद्र बने हुए हैं। धार्मिक आयोजनों के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ यह क्षेत्र कृषि प्रधान भी है। पंचायत के अधिकांश ग्रामीण खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं और कृषि ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है।

ग्रामीणों का कहना है कि आधुनिकता के दौर में भी जमुनिया पंचायत ने अपनी धार्मिक विरासत, लोक संस्कृति और पारंपरिक आयोजनों को जीवित रखा है। यही कारण है कि यह पंचायत क्षेत्र में आस्था, संस्कृति और ग्रामीण एकता की मिसाल बनकर उभर रही है।

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