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बारिश शुरू होते ही भोपाल-विदिशा हाईवे 18 पर फिर शुरू हुआ बेजुबान पशुओं की मौत का सिलसिला

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मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

बारिश का मौसम शुरू होते ही भोपाल-विदिशा हाईवे 18 एक बार फिर बेजुबान पशुओं के लिए मौत का रास्ता बनता नजर आ रहा है। पिछले साल दर्जनों पशुओं की जान लेने वाला यह हाईवे इस वर्ष भी हादसों का गवाह बनने लगा है।

एक दिन पहले बालमपुर चौराहे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से एक बछड़े की मौके पर ही मौत हो गई थी। एक तेज रफ्तार बोलेरो पिकअप ने एक गाय को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में गाय गंभीर रूप से घायल हो गई और पूरी रात व दिनभर हाईवे पर तड़पती रही, लेकिन उसे समय पर उपचार या सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष बेरखेड़ी चौराहे से बालमपुर घाटी तक 10 किलोमीटर मार्ग पर करीब 60 पशुओं की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई थी। इसके बावजूद न तो हाईवे पर पशुओं की आवाजाही रोकने के प्रभावी इंतजाम किए गए और न ही वाहन चालकों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि दुर्घटना में मारे गए पशुओं के शव कई-कई दिनों तक सड़क किनारे पड़े रहते हैं। इससे आवारा कुत्ते शवों को नोचते रहते हैं, दुर्गंध फैलती है और राहगीरों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और एमपीआरडीसी से मांग की है कि हाईवे पर पशुओं की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं, दुर्घटना में घायल पशुओं का तत्काल उपचार कराया जाए तथा मृत पशुओं को तुरंत हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर, पर्याप्त रोशनी और वाहन चालकों पर गति नियंत्रण के प्रभावी उपाय किए जाएं, ताकि लगातार हो रही इन दर्दनाक घटनाओं पर रोक लग सके।

बता दे की बारिश आते ही पशुओं का झुंड हाईवे 18 पर कई जगह बैठा रहता है जो दुर्घटनाओं का एक मुख्य कारण है। वाहन चालक रात के समय इन पशुओं को अंधेरा होने के कारण देख नहीं पाते हैं जिससे दुर्घटना में इन पशुओं की मौत हो जाती है। यह सिलसिला कई बरसों से चला रहा है। पिछले वर्ष प्रशासन के आदेश पर पंचायत द्वारा मुनादी कर दी गई थी। कि पशु मालिक अपने पशुओं को घर में बांधकर रखें या गौशाला में छोड़ दे। मुनादी के बावजूद भी कई पशु मालिक द्वारा पशुओं को नहीं बांधा गया था। जिस कारण 60 पशुओं की मौत दुर्घटना में हुई थी। इस साल अभी इस तरह के कोई आदेश लागू नहीं हुआ है।

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