कांग्रेस ने किया सरकार का पुतला दहन
सुरेंद्र जैन रायपुर
कांग्रेस ने आज नकटी में अतिक्रमण हटाने के नाम हुई हृदय विदारक घटना को लेकर रायपुर में सरकार का पुतला दहन किया ओर जब तक न्याय नहीं मिलता तब तक के लिए ग्रामीणों के हित में अपने संघर्ष का ऐलान करते हुए वित्त मंत्री के निवास के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया।
पीसीसी ओवेशी के कार्यकारी अध्यक्ष भावेश बघेल ने बताया कि नकटी ग्राम के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आज जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं ग्रामीण एकत्रित हुए और प्रदेश सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर सरकार की कार्यशैली के प्रति नाराजगी व्यक्त की गई।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नकटी के पीड़ित परिवार लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी पीड़ा सुनने के बजाय लगातार मौन बना हुआ है। अनेक बार ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन के बावजूद अब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार आम लोगों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन वर्तमान सरकार संवेदनशीलता दिखाने के बजाय जनभावनाओं की लगातार अनदेखी कर रही है। जब पीड़ित परिवार न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हों, तब यह शासन और प्रशासन दोनों की विफलता को दर्शाता है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा पीड़ितों, गरीबों और वंचितों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ती रहेगी। यदि सरकार ने शीघ्र ही पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं दिया और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि नकटी प्रकरण में पीड़ित परिवारों को तत्काल न्याय दिया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर सरकार के प्रति अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता, ग्रामीण एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।