अहमदाबाद में 51 हजार और दमोह में 10 हजार की राशि से सम्मानित हो चुके बलवान सिंह जैविक खेती के लिए कर रहे प्रेरित
रसायनिक खाद से क्षणिक फायदा पर दूरगामी परिणाम घातक:बलवान सिंह
दमोह से धीरज जॉनसन की रिपोर्ट
वर्तमान समय में खेती योग्य जमीनों की लगातार कम हो रही उर्वरा शक्ति को बरकरार रखने के लिए किसान रसायनिक खाद का ज्यादा उपयोग करता है जिससे फसल तो अच्छी हो जाती है और धनार्जन भी होता है परंतु दूरगामी परिणाम काफी खतरनाक भी हो सकते है,रसायनिक खाद के ज्यादा इस्तेमाल से जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने के साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है प्राचीन समय में किसान देसी खाद का इस्तेमाल करता था जिससे उसे पोष्टिक भोजन मिलता और कई बीमारियों से निजाद पाता था, जमीन – जल भी प्रदूषित होने से बच जाते थे,परंतु आधुनिक तकनीक आ जाने से वर्तमान पीढ़ी कम मेहनत में अधिक कमाई तो कर रही है पर समस्याएं भी उत्पन्न कर रही है।
परंतु अभी भी जिले के कुछ हिस्सों में ऐसे भी किसान है जो न केवल स्वयं जैविक खेती कर रहे है बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन रहे है और जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक सम्मान भी प्राप्त कर चुके है।

जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर ग्राम भरतला के किसान बलवान सिंह राजपूत (68) पिछले 15 वर्षो से अपनी जमीन के लगभग दो एकड़ हिस्से में जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे है और विभिन्न प्रकार की फसल, सब्जी और फलदार वृक्ष लगा रहे है एक बार तो उन्होंने एक एकड़ जमीन पर 35 क्विंटल धान पैदा कर दी जिसकी बाकायदा तीन बार जांच हुई पर सत्यता पाई गई इसके बाद उन्हें कृषि विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक सम्मान मिला।

बलवान सिंह को वैसे तो जिले के किसान कल्याण तथा कृषि विभाग,कृषि विज्ञान केंद्र,कलेक्ट्रेट से प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुए पर सन 2013 में हुए सम्मेलन में उन्हें 51 हजार रुपए की राशि अहमदाबाद में प्राप्त हुई साथ ही उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी हस्ताक्षरित सम्मान पत्र भी मिला,जो आज प्रधानमंत्री है यह उनके लिए काफी खुशी का क्षण था,दमोह में उन्हें सर्वोत्तम कृषक पुरुस्कार और 10 हजार रूपए से सम्मानित किया गया,समय समय पर वे किसानों को जैविक खेती के फायदे, खाद तैयार करने के तरीकों और उसके लाभ से अवगत करते है और बताते है कि धीरे धीरे प्रयास करें तो कुछ साल में ही जमीन गुणकारी हो जाएगी, उनके खेत पर भी कृषि से संबंधित विभिन्न टीम आ चुकी है।
बलवान सिंह बताते है कि इसकी प्रेरणा उन्हे ग्राम सेवक एन एल अहिरवार से मिली जो भरतला में थे उनके सुझाव से उन्होंने वर्मि कमपोस्ट के लिए हौदी और नाडेप टांका (बड़ी हौदी) बनवाई एक अन्य अधिकारी मुकेश ने भी उनका सहयोग किया,और उन्होंने 2007 से जैविक खेती प्रारंभ की, कम लागत में ज्यादा उपज प्राप्त की।

सन 2013 में उन्होंने एक एकड़ में 35 क्विंटल धान पैदा की जिसकी अधिकारियों ने जांच की जो सही पाई गई। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंची उन्होंने बुलाया फिर अहमदाबाद पहुंचाया जहां प्रदेश के 44 जिलों से किसान पहुंचे थे वहां पर भी वे सम्मानित हुए।

वर्तमान में उन्होंने खेत पर छह हौदी बनवा ली है। अगर स्वयं मेहनत करें तो एक हौदी(डेढ़ फीट ऊंचाई,पांच फीट लंबाई,ढाई फीट चौड़ाई) पंद्रह सौ रुपए और बड़ी हौदी पांच हजार रुपए में बन जाती है।इनके खेत में फसल के साथ सब्जियां भी लगाई जाती है।वे कहते है कि ट्रैक्टर की सहायता से खेती करने से जमीन कड़ी हो जाती है,बैलों से जुताई/ बखरने से मिट्टी मुलायम,होती है और अच्छी पैदावार होती है,पर अब लोग मेहनत करना नहीं चाहते, उन्हे सुविधा चाहिए,इससे जमीन और जल दोनो को नुकसान हो रहा है। इस दौरान बलवान सिंह ने खाद बनाने,फसल बढ़ाने और कीट से बचाने के तरीके भी बताए।
फसल बढ़ाने की तकनीक
दस किलो गौमूत्र
दो किलो काली मिट्टी
दो किलो गुड़
एक किलो बेसन
25 लीटर का बर्तन में सड़ने दें।
15 दिन बाद फिर घोल बनाए,पहले बड़ी छन्नी फिर छोटी छन्नी से छान ने फिर इसके एक लीटर घोल और 12 लीटर पानी मिला कर इस्प्रे पंप से छिड़काव कर दें।
फसल में लगी कीट खत्म करने के लिए
दस किलो मठ्ठा
दो किलो नीम की पत्ती
पांच किलो गौमूत्र
दो किलो धतूरे की पत्ती
दो किलो अकौआ की पत्ती।
पचास किलो क्षमता की प्लास्टिक की टंकी,
इसमें भरकर,ढक्कन लगा कर मिट्टी से छाप दें।
यह काम जरूरत से एक माह पूर्व कर लें,फिर घड़ी की विपरित दिशा में लकड़ी से घुमा कर दो बार छान लें,एक लीटर दवाई और करीब 12 लीटर पानी भरकर छिड़काव कर दें।
केंचुआ खाद बनाने का तरीका
मवेशी का गोबर,भूंसा,कचरा,पत्ते का ढेर बना लें,बीस किलो गोबर से नाडेप टांके ( 12 फीट लंबा,6 फीट चौड़ा,3 फीट ऊंचा,106 छिद्र) को लीप दें एक फुट कचरा उसके ऊपर दो तसला बारीक मिट्टी,फिर गोबर फिर पानी इसी तरह पांच बार कर दें फिर ऊपर से मिट्टी छाप दें। अगर वर्मी खाद की जरूरत है तो अधपका कचरा निकाल और वर्मि में जमा किया,दूसरी हौदी से लाकर दो किलो कैचुआ छोड़ दिया एक सप्ताह में पानी दें छिद्र से खाद आने लगे तो समझो खाद पक गया उसे बोरियों में भरकर छायादार स्थान पर रखें।
न्यूज स्रोत:धीरज जॉनसन