ओवर रेट से खुलेआम लूटे जा रहे शराब उपभोक्ता..
रायसेन में ‘QR कोड’ का दांव—हकीकत या सिर्फ सरकारी दिखावा..
रिपोर्ट – विजय सिंह राठौर, रायसेन 9425044066
रायसेन जिले में आज चर्चा उस विभाग की, जिसकी ‘नजर’ तो तेज है, पर नीयत शायद साफ नहीं है..
मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने एक नया नियम निकाला है—“QR कोड स्कैन करो और सही दाम जानो।” दावा है कि अब ओवरचार्जिंग करने वाले दुकानों के लाइसेंस सीधे रद्द होंगे। लेकिन सवाल यह है कि रायसेन जिले लगभग सभी तहसीलों में जहाँ शराब दुकानों पर खुलेआम ओवर रेट वसूली एक ‘परंपरा’ बन चुकी है, क्या इस डिजिटल कोड सच में वसूली का खेल खत्म कर पाएगा?
1. नियम बनाम जमीनी हकीकत (The Ground Reality)
विभाग कहता है कि हर दुकान पर QR कोड होगा। ग्राहक मोबाइल निकालेगा, स्कैन करेगा और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन साहब, रायसेन जिले की हकीकत तो कुछ और ही है।
70% नगद का खेल: जब 70 फीसदी बिक्री कैश में होती है, तो कितने ग्राहक मोबाइल निकालकर रेट चेक करने की ज़हमत उठाएंगे?
अघोषित ‘एक्स्ट्रा’ चार्ज: रायसेन खरबई मंडीदीप सांची और आसपास के इलाकों में दुकानों पर प्रिंट रेट से 10, 20 या 50 रुपये ज्यादा लेना एक आम बात है। यहाँ QR कोड नहीं, ‘दबंगई’ का कोड चलता है।
2. ‘रेट लिस्ट’ गायब, सिर्फ QR का सहारा क्यों?
अब ऐसे में सिर्फ डिजिटल निगरानी से काम नहीं चलेगा।
जब तक दुकान के बाहर बड़े और साफ अक्षरों में “रेट लिस्ट” नहीं टंगी होगी, तब तक आम आदमी ठगा जाता रहेगा।
क्या विभाग को नहीं पता कि ग्रामीण इलाकों में हर किसी के पास स्मार्टफोन या डेटा नहीं होता? क्या उनके लिए लूट की छूट है?
आबकारी विभाग की ‘सख्ती’ पर सवाल
विभाग चेतावनी दे रहा है कि लाइसेंस रद्द होगा। मगर सवाल यह है कि क्या रायसेन आबकारी अधिकारी उन दुकानों का औचक निरीक्षण करेंगे जहाँ शाम ढलते ही रेट बदल जाते हैं?
क्या सिर्फ QR कोड चिपका देना ही विभाग की जिम्मेदारी की इतिश्री है? जांच अभियान के नाम पर खानापूर्ति होगी या सच में किसी बड़े रसूखदार दुकानदार पर गाज गिरेगी? जिनके गुंडे खुलेआम शहरों में आतंक का पर्याय बन चुके हैं।
रायसेन जिले में पारदर्शिता मोबाइल के कैमरे से नहीं, बल्कि विभाग की ईमानदारी से आएगी। डिजिटल इंडिया का स्वागत है, लेकिन जब तक साफ रेट लिस्ट और सख्त ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ये QR कोड सिर्फ दीवारों पर टंगे सजावटी कागज बनकर रह जाएंगे।
नियम खूंटी पर न टंगे, इसके लिए जरूरी है कि विभाग कागजों से बाहर निकलकर दुकानों के काउंटर तक पहुँचे। रायसेन जिले की जनता और रायसेन के ग्राहक अब ‘स्कैनर नहीं, बल्कि ‘सही दाम’ चाहते हैं।