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दरगाह शरीफ मजार सालाना उर्स:कोरोना के दो साल बाद पूरे उत्साह के साथ मनेगा 801 वां उर्स, देशभर से आएंगे जायरीन

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शिवलाल यादव रायसेन

रायसेन जिला मुख्यालय से करीब 3 किमी दूर भोपाल रोड़ स्थित दरगाह शरीफ पर शहंशाह-ए-मालवा हजरत पीर फतेह उल्लाह साहब की मजार शरीफ पर 4 नवंबर शुक्रवार से सालाना 801वां उर्स प्रारंभ होने जा रहा है। जो 7 नवंबर को कुल की दुआ के साथ समाप्त होगा। कोरोना काल के दो साल बाद यह पहला अवसर है,जब यह उर्स पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उर्स स्थल पर मेला भी लगेगा और रात में कव्वाली और मुशायरे का दौर भी चलेगा। उर्स के पहले दिन कलेक्टर अरविंद दुबे के आदेश पर जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से बाबा साहब के दरबार में पहली चादर पेश करने के साथ ही लोगों की खुशहाली अमन शांति की कामना की जाएगी।
दरगाह पर पहली चादर चढ़ाने की परंपरा नबाबी रियासत के शासन काल से ही बरसों पुरानी चली आ रही है। इससे पहले की रियासत के नाजिर पहली चादर चढ़ाते थे।भारत देश की आजादी के बाद 1949 (दो साल बाद मिली आजादी) से प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर कलेक्टर द्वारा पहली चादर चढ़ाई जाने की परंपरा शुरू हो गई,।जो अब तक कायम है। रायसेन की शहंशाहे मालवा हज़रत पीर फतेह की दरगाह मजार देश भर में प्रसिद्घ है । यहां पर उर्स में शामिल होने के लिए देशभर से जायरीन के साथ ही अन्य श्रद्धालु भी बड़ी संख्या आते है, जो यहां पर श्रद्धा आस्था के साथ सजदा करते हैं।इस दौरान मजहब की सभी दीवारें टूट जाती है।मजार पर श्रद्धालु मत्था टेकने के साथ देश की अमन चेन और खुशहाली के लिए दुआ करते है ।

दुकानों के लिए मैदान किया समतल ….
दरगाह शरीफ मजार पर होने वाले सालाना उर्स को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई । मेला ग्राउंड पर लगने वाली दुकानों के लिए मैदान को समतल कराया जा रहा है। साथ ही यहां पर बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले सर्कस खेल तमाशे भी लगाए जा रहे है । साथ ही अन्य लज़ीज पकवानों की दुकानें भी लगने वाली है ।

रात में सजेंगी कव्वालियों की मेहफिल …….
दरगाह शरीफ मजार शरीफ परिसर में रात में रंगारंग कब्बलियों की महफ़िल सजेंगी।रंगारंग कव्वाली का मुकाबला भी होगा। 4 नवंबर को मुशायरा होगा। जबकि 5 और 6 नवंबर की रात में कव्वालों के बीच मुकाबला होगा,जो एक से बढ़कर कव्वाली पेश करके अपनी फन से लोगों को बांध कर रखेंगे । कव्वाली का कार्यक्रम रात भर चलेगा । 7 नवंबर को कुल की दुआ के साथ उर्स का समापन होगा । उर्स के दौरान भोपाल, इंदौर, विदिशा सागर सहित देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु यहां आते हैं। समापन के दौरान यहां जर्दा (मीठे चावल का शाकाहारी प्रसाद) वितरित किया जाएगा।

शहर में निकाली चादर पदयात्रा…..
शहंशाह-ए-मालवा मालवा हजरत बाबा पीर फतेह उल्लाह साहब की मजार पर लगने वाले सालाना उर्स के उपलक्ष्य में सांची रोड़ स्थित मजार से हर साल की तरह इस साल भी ढोलनगाड़ों डीजों के साथ चादर पोशी पदयात्रा गुरुवार को सुबह निकाली गई।यह चादर पदयात्रा इरशाद मामू के नेतृत्व में निकाली गई।जो दरगाह शरीफ मजार पहुंचकर समाप्त हुई।जहां मजार पर अकीदत के साथ चादर पेश की गई।

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