सुबह भोपाल जाने और शाम को लौटने के लिए नहीं मिलती ट्रेन, छह साल से ग्रामीण परेशान
बस किराया बढ़ने से जेब पर अतिरिक्त भार
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रायसेन जिले के सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाला दीवानगंज रेलवे स्टेशन पिछले छह वर्षों से यात्रियों की सुविधा के बजाय परेशानी का केंद्र बना हुआ है। आसपास के करीब 30 गांवों के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण इस स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की संख्या लगातार कम होती जा रही है। स्थिति यह है कि सुबह के समय भोपाल जाने के लिए पर्याप्त ट्रेन उपलब्ध नहीं है, जबकि शाम को भोपाल से लौटने वाले यात्रियों के लिए भी नियमित रेल सुविधा नहीं है।
कोरोना काल से पहले दीवानगंज स्टेशन पर चार से पांच यात्री ट्रेनों का ठहराव हुआ करता था। इनमें भोपाल-बिलासपुर, नागपुर-झांसी पैसेंजर, जोधपुर-भोपाल और बीना-भोपाल पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल थीं। लेकिन कोरोना काल के बाद रेलवे विभाग ने अधिकांश ट्रेनों का संचालन और ठहराव बंद कर दिया। अब यात्रियों को सीमित मेमो और बिलासपुर ट्रेन पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
बस से सफर करना पड़ा महंगा
ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को मजबूरी में फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज तक जाना पड़ता है। यहां से बसों के माध्यम से भोपाल, विदिशा, सांची और रायसेन सहित अन्य शहरों की यात्रा करनी पड़ती है। स्टेशन से फैक्ट्री चौराहा करीब तीन किलोमीटर दूर है, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।
कुछ दिन पहले ही बस किराए में बढ़ोतरी होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। अब बस किराया दो रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से लिया जा रहा है। ऐसे में भोपाल और विदिशा जाने वाले ग्रामीणों को पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है।

24 घंटे में चुनिंदा ट्रेनों का ही ठहराव
वर्तमान में दीवानगंज रेलवे स्टेशन पर भोपाल से विदिशा की ओर जाने वाली मेमो ट्रेन सुबह लगभग 7:30 बजे रुकती है। वापसी में शाम करीब 7 बजे भोपाल की ओर जाने वाली ट्रेन का ठहराव है। इसके अलावा बिलासपुर ट्रेन का निर्धारित समय पर ठहराव बताया जा रहा है।
सुबह भोपाल की ओर जाने वाले और शाम को भोपाल से लौटने वाले यात्रियों के लिए बीच के समय में कोई नियमित यात्री ट्रेन उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों पर पड़ रहा है।
रोजाना तीन किलोमीटर का चक्कर लगाने को मजबूर
ग्राम सेमरा निवासी हेमंत लोधी ने बताया कि वे एलआईसी से संबंधित कार्य करते हैं और उन्हें रोजाना भोपाल एवं अन्य शहरों में जाना पड़ता है। दीवानगंज स्टेशन पर ट्रेन नहीं रुकने के कारण उन्हें करीब तीन किलोमीटर का चक्कर लगाकर फैक्ट्री चौराहा पहुंचना पड़ता है। वहां से बस के माध्यम से यात्रा करनी पड़ती है। यदि स्टेशन पर नियमित ट्रेनों का ठहराव शुरू हो जाए तो आसपास के हजारों ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है।
ग्राम सेमरा निवासी मुकेश लोधी ने बताया कि कोरोना काल से पहले दीवानगंज रेलवे स्टेशन पर चार यात्री ट्रेनों का ठहराव था। बाद में रेलवे विभाग ने अधिकांश ट्रेनों का संचालन और स्टॉपेज बंद कर दिया। वर्तमान में यात्रियों की निर्भरता मुख्य रूप से मेमो ट्रेन पर बढ़ गई है, जो दिन में सीमित समय पर ही उपलब्ध होती है।
एक साल पहले दिया आवेदन, अब तक कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर कई बार रेलवे अधिकारियों को आवेदन दिए जा चुके हैं। करीब एक वर्ष पहले रेलवे के जीएम को भी आवेदन देकर भोपाल और विदिशा के बीच चलने वाली यात्री ट्रेनों का दीवानगंज स्टेशन पर ठहराव शुरू करने की मांग की गई थी। लेकिन आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक रेलवे विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे विभाग इसी तरह उदासीन बना रहा तो आने वाले समय में दीवानगंज रेलवे स्टेशन का अस्तित्व केवल नाम तक सीमित रह जाएगा। यात्री सुविधाओं के अभाव में लोग मजबूरी में बसों और निजी वाहनों का सहारा लेने लगेंगे।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने रेलवे विभाग से मांग की है कि दीवानगंज रेलवे स्टेशन पर पूर्व की तरह भोपाल, विदिशा और अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनों का नियमित ठहराव शुरू किया जाए। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समस्या का समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र के ग्रामीण एकजुट होकर रेलवे विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
फैक्ट्री चौराहा से बस पकड़ना मजबूरी
दीवानगंज और आसपास के गांवों के यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से उन्हें पहले फैक्ट्री चौराहा पहुंचना पड़ता है। कई बार सुबह जल्दी और शाम के समय बसों की सुविधा भी सीमित रहती है। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्गों और मरीजों को विशेष परेशानी उठानी पड़ती है।