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डीन अक्षय निगम का नया कारनामा …कमिश्नर को गुमराह कर बनाया नया नियम

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-न खाता न बही साहव जो बोलें वही सही …..

संजय बेचैन , ग्वालियर

एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह रोज सुबह पौ फटते ही वीड़ियो कान्फ्रेंस के जरिये सरकारी साहबों को गोलमाल पर जीरो टोलरेंस का गीता ज्ञान परोसते हैं, उधर साहब लोग इस कान सुनते हैं और उस कान निकाल देते हैं । अब ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में संभागीय आयुक्त एवं वहाँ के अधिष्ठाता अक्षय निगम की मिलीजुली भगत से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं । ऐसा लगता है जैसे नियम कानून सरकार नहीं बल्कि इनके घरों से बनाए जाने लगे हैं । इनके इस कारनामे से लापरवाह चिकित्सकों को नाई राह मिल गई है । अब शायद इसी प्रकरण का उदाहरण देकर वे मनमानी कर सकेंगे ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर में एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों के साथ खिलवाड़ तो किया ही जा रहा है साथ ही शासन को घोर वित्तीय हानी पहुंचाई जा रही है । पूरे मामले मे लाखों की डीलिंग के चर्चे हैं ।

मामला इस प्रकार समझिए

डॉक्टर नीरज अग्रवाल यूरोलॉजी विभाग सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सहायक प्राध्यापक के पद पर पदस्थ थे1 सेवा नियमों के अनुसार सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पदस्थ कोई भी प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता जबकि डॉ नीरज अग्रवाल द्वारा शासन की आंखों में धूल झोंक कर सरेआम क्लीनिक खोलकर बोर्ड लगाकर प्राइवेट प्रैक्टिस की गई, इसकी शिकायत तत्कालीन अधिष्ठाता के समक्ष हुई । शिकायत के साथ-साथ साक्ष्य के रूप में उनके क्लीनिक के फोटो संलग्न किए गए। शिकायत के आधार पर एक जांच समिति बनी ,जांच समिति द्वारा जांच रिपोर्ट तैयार की गई जिसमें डॉक्टर नीरज अग्रवाल को दोषी पाया गया तथा जांच समिति द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में डॉक्टर नीरज अग्रवाल के विरुद्ध कार्रवाई किया जाना प्रस्तावित की गई। इसी बीच डॉक्टर नीरज अग्रवाल अनाधिकृत रूप से यूरोलॉजी विभाग से आज दिनांक तक अनुपस्थित हो गया अर्थात सुपर स्पीडी अस्पताल में उपस्थित नहीं हुआ । इस संबंध में तत्कालीन अधिष्ठाता द्वारा इन्हें कई बार नोटिस जारी किए गए और उनसे स्पष्टीकरण भी चाहा गया किंतु डॉक्टर नीरज अग्रवाल ने ना तो कोई पत्रों का जवाब दिया और ना ही अपने कार्य पर उपस्थित हुए। लगभग डेढ़ साल से अधिक समय से अनुपस्थित होने के कारण तत्कालीन टीम द्वारा कार्यकारणी अध्यक्ष संभागीय आयुक्त के समक्ष डॉक्टर नीरज अग्रवाल की सेवा समाप्त किया जाना प्रस्तावित किया गया1 आयुक्त द्वारा डॉक्टर नीरज अग्रवाल के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई। महोदय इस समय डीन डॉ अक्षय निगम एवं आयुक्त की मिलीभगत से शासन को वित्तीय हानि पहुंचाते हुए दोषी डॉक्टर नीरज अग्रवाल को लाभ पहुंचाने की हद तो देखिए कि हाल ही में सभी नियमों को ताक पर रखते हुए, समिति की बैठक दिनांक 2 सितंबर 2022 को आयोजित की गई जिसमें अनुपस्थित डॉक्टर नीरज अग्रवाल को पदोन्नति संबंधी लाभ पहुंचाने के लिए प्रस्तावित किया गया साथ ही डीन एवं आयुक्त की मेहरबानी तो देखिए कि लगभग डेढ़ साल से अनुपस्थित डॉक्टर जिसकी सेवाएं समाप्त किया जाना भी प्रस्तावित हुआ था उसको उन्हें नियमों को ताक पर रखकर अवैतनिक अवकाश स्वीकृत कर सेवा में पुनः बहाल करने का आदेश दिया गया।
डॉक्टर नीरज अग्रवाल को दंडित करने की जगह शासन के नियमों के साथ खिलवाड़ करते हुए उन्हें ज्वाइन कराया जा रहा है हाल ही में जारी आदेश में डॉक्टर नीरज अग्रवाल को कितने समय में उपस्थित होना है समयावधि का भी उल्लेख जानबूझकर नहीं किया गया है ताकि दोषी डॉक्टर किसी भी समय अपनी मनमर्जी से उपस्थित हो सके और पुनः अपराध की पुनरावृति कर सकें।

लापरवाह चिकित्सकों को मिली नई राह

आयुक्त एवं टीम की इस कार्यप्रणाली से अस्पताल में अन्य चिकित्सक जो इमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं वह शासकीय सेवा में हतोत्साहित होंगे या फिर इसी प्रकार नियम विरुद्ध तरीके से कार्य करने का बढ़ावा मिलेगा । इस प्रकार से तो चिकित्सा महाविद्यालय में नियमों को तोड़ा जाना एक परंपरा बन कर रह जाएगी।

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