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देवदरा पहुंचने के लिए तालाब की मेढ़ ही सहारा:बारिश के मौसम में पार करना कठिन,विकास के इंतजार में ग्रामीण

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दमोह से धीरज जॉनसन

दमोह जिला मुख्यालय से सुदूर अंचलों में कहीं कहीं निवास कर रहे ग्रामीण न्यूनतम आवश्यकताओं, मितव्ययता और आधुनिकता-प्राचीनता के साथ तालमेल कर जीवन यापन कर रहे है व प्रगति की बाट जोह रहे है क्योंकि यहां अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची है।

बटियागढ़ तहसील की ग्राम पंचायत हरदुआ जामसा के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्कूल के बच्चे और ग्रामीण आज भी कच्चे मार्ग और तालाब की मेढ़ से आना जाना करते है क्योंकि सड़क मार्ग अब तक नही बना है पर मजदूरी कर समय बिता रहे लोगों को विकास का आश्वासन जरूर मिलता रहता है।


हटा-रजपुरा सड़क मार्ग पर फतेहपुर से देवदरा जाने के लिए तालाब की मेढ़ से करीब तीन किमी का सफर तय करना पड़ता है जब बारिश का मौसम नहीं रहता है तब दोपहिया वाहन यहां से निकल जाते है परंतु बरसात में पैदल चलकर आना जाना भी मुश्किल होता है क्योंकि तालाब की मेढ़ के साथ साथ ओवरफ्लो का पानी भी गांव के समीप तक पहुंच जाता है इसलिए ग्रामीण लंबी दूरी तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचते है।

करीब 180 की आबादी वाले इस क्षेत्र के प्रायमरी स्कूल के शिक्षक की जानकारी के अनुसार प्रवेशित छात्रों की संख्या 30 है जिसमें से कुछ बच्चे पास के इलाके से भी आते है पर बरसात में वह रास्ता भी पानी के कारण अवरुद्ध हो जाता है यहां कच्चे पक्के दोनो तरह के घर दिखाई देते है और स्कूल में स्वच्छता की नितांत आवश्यकता महसूस होती है।

स्कूल के प्रवेश द्वार पर झाड़ियों दिखाई देती है जो गेट का काम करती है और यहां मैदान में गोबर का ढेर भी दिखाई देता है परिसर में लगे हैंडपंप के चारों और खरपतवार व पानी निकलने के स्थान पर एक पत्थर रखा हुआ है जिससे पानी भरने में आसानी हो। परिसर के चारों तरफ पत्थर रखकर दीवार बना दी गई है परंतु स्कूल के सामने मुक्तिधाम का चबूतरा और उसमें लगे हुए पिलर दिखाई देते है। हालांकि स्कूल परिसर को पत्थरों की दीवार बना कर घेरा गया है पर स्कूल के सामने बने मुक्तिधाम को तीन तरफ से न घेरने के कारण यह स्कूल के सामने दिखाई देता है।

यहां के ग्रामीण मंगल, करन,मानसिंह,नारायण ने बताया कि यहां अधिकतर मजदूर लोग है कोई सुविधा नहीं है,कुछ घर तो आस पास से पत्थर लाकर बनाएं है,पानी ज्यादा गिर जाए तो आफत आ जाती है,अभी तक सड़क मार्ग नहीं है फिर भी कैसे जी रहे है यह हम ही जानते है कोई बीमार हो जाए तो बहुत मुश्किल होती है।

प्राथमिक स्कूल के शिक्षक रमेश सिंह ने बताया कि कच्चा रास्ता है तो पैदल आना जाना पड़ता है ज्यादा बारिश के पास के क्षेत्र के बच्चे नहीं आ पाते है। पर हरदुआ से सड़क मार्ग बन सकता है।स्कूल के सामने मुक्तिधाम का चबूतरा शोभा नहीं देता है इसलिए स्कूल की बैठक में निर्णय लिया है कि ग्राम पंचायत में प्रस्ताव भेज कर कहा जाए कि चबूतरे को छोड़ कर पिलर को कटवा दिया जाए।

न्यूज स्रोत:धीरज जॉनसन

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