जीआरपी पुलिस आगे की कर रही है कार्रवाई
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रायसेन जिले के सांची विकासखंड की ग्राम पंचायत अंबाडी में एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। अंबाडी-छपरई रेलवे क्रॉसिंग पर एक व्यक्ति रेलवे ट्रैक पार कर मोटरसाइकिल निकाल रहा था, तभी अचानक ट्रेन आ गई। जान बचाने के लिए वह बाइक ट्रैक पर छोड़कर भाग गया। कुछ ही क्षणों में ट्रेन ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी और वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटनास्थल पर जीआरपी पुलिस आई और मोटरसाइकिल को उठाकर साथ ले गई। जीआरपी पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। यह घटना एक बार फिर उस गंभीर समस्या को सामने ले आई है, जिससे अंबाडी सहित आसपास के कई गांवों के लोग पिछले आठ वर्षों से जूझ रहे हैं।

8 साल से बंद रेलवे फाटक, बारिश में बंद हो जाता है अंडरपास
पन्नालाल लोधी, महेंद्र पटेल,विक्की मीणा, मुकेश लोधी, सुनील सेन, भानु लोधी सरपंच सेमरा,सेतान लोधी, ग्रामीणों के अनुसार रेलवे विभाग ने करीब आठ वर्ष पहले अंबाडी-छपरई रेलवे फाटक को बंद कर दिया था। इसके विकल्प के रूप में बनाए गए अंडरपास में हर बारिश के मौसम में पानी भर जाता है, जिससे चार महीने तक आवागमन लगभग ठप हो जाता है। मजबूरी में लोग तीन रेलवे पटरियां पार कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
रोज 150 से 200 बाइक सवार और सैकड़ों पैदल यात्री पार करते हैं रेलवे लाइन
अंबाडी, सेमरा, केमखेड़ी, कालीटोर, पिपरई, मुनारा, खेड़ा सहित आसपास के गांवों के लोग रोजाना दीवानगंज, सांची, रायसेन और विदिशा आने-जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार करते हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली विद्यार्थियों को होती है, जिन्हें पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दीवानगंज और पीएम श्री हाई स्कूल सेमरा पहुंचने के लिए रोज तीन रेलवे लाइनें पार करनी पड़ती हैं।
पहले भी जा चुकी है छात्र की जान
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीने पहले रेलवे ट्रैक पार करते समय एक छात्र की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद रेलवे और प्रशासन ने स्थायी समाधान नहीं निकाला। बारिश के दिनों में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है।

किसानों की भी बढ़ी मुश्किल
रेलवे लाइन के दूसरी ओर खेत होने के कारण किसानों को खेती-किसानी के लिए दिन में कई बार रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। भोपाल-बीना रेलखंड पर लगभग हर 15 मिनट में ट्रेन गुजरने से हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।
कई बार दिए आवेदन, फिर भी समाधान नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि रेलवे के डीआरएम , जनसुनवाई, तहसील कार्यालय को आवेदन देकर फाटक खोलने या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की जा चुकी है। एक माह पहले रेलवे विभाग द्वारा बाउंड्री वॉल बनाकर रास्ता पूरी तरह बंद करने का प्रयास किया गया था, लेकिन ग्रामीणों के विरोध, जनसुनवाई और एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद काम रोक दिया गया। इसके बावजूद समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। किसानों और ग्रामीणों ने मांग की है कि रास्ते के लिए विभाग द्वारा स्थाई व्यवस्था की जाए ताकि आगे आज से होने से बच सके।
ग्रामीणों ने क्या कहा
रघुवीर सिंह मीणा, स्थानीय निवासी, अंबाडी ने कहा, “हमारे खेत रेलवे लाइन के उस पार हैं। रोज ट्रैक पार करना मजबूरी है। कई बार प्रशासन को बताया, लेकिन आज तक समाधान नहीं हुआ।”
आकाश सिंह, स्थानीय निवासी ने कहा, “बारिश होते ही अंडरपास बंद हो जाता है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर मोटरसाइकिल रेलवे लाइन से निकालते हैं।”
कुंती रमेश कुमार अहिरवार, सरपंच, अंबाडी ने कहा, “डीआरएम सहित कई अधिकारियों को आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। रोज ग्रामीण और विद्यार्थी रेलवे ट्रैक पार कर रहे हैं। पहले भी हादसे हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं है।”
सबसे बड़ा सवाल
इस घटना में एक व्यक्ति की जान तो बच गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है? आखिर कब खुलेगा बंद रेलवे फाटक या कब मिलेगी ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था, जिससे हजारों ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की जान सुरक्षित रह सके?