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 मूर्तिकारों ने गणेश प्रतिमाओं को दिया अंतिम रूप, भोपाल-विदिशा तक पहुंच रही यहां की प्रतिमाएं

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 मिट्टी, लकड़ी और रंग-रोगन महंगा होने से 25 से 30 फीसदी बढ़े दाम, दो महीने की मेहनत के बाद तैयार होती है एक प्रतिमा

 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

गणेश उत्सव को लेकर क्षेत्र में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सोमवार से शुरू होने वाले गणेश उत्सव को लेकर दीवानगंज सहित अंबाड़ी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, बालमपुर, कुलहड़िया और देहरी समेत आसपास के गांवों में गणेश उत्सव समितियां पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। वहीं अंबाड़ी गांव में प्रजापति समाज के मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यहां तैयार होने वाली मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग अब आसपास के गांवों के साथ भोपाल और विदिशा तक होने लगी है।

अंबाड़ी में इस बार 10 फीट तक ऊंची गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकार प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई, सजावट और अन्य काम पूरा करने में जुटे हैं। कलाकारों के अनुसार प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी, लकड़ी, रंग-रोगन और अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से इस बार प्रतिमाओं की कीमतों में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद गणेश प्रतिमाओं की मांग में कमी नहीं आई है।

दो महीने की मेहनत के बाद आकार लेती है प्रतिमा

अंबाड़ी निवासी हल्के राम प्रजापति, अमन प्रजापति, राहुल प्रजापति, छोटू प्रजापति सहित अन्य कलाकारों ने बताया कि उनका परिवार कई वर्षों से मिट्टी की गणेश, दुर्गा, लक्ष्मी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। यह परंपरा उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है और अब नई पीढ़ी भी इसे आगे बढ़ा रही है।

मूर्तिकारों के मुताबिक एक प्रतिमा को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगता है। मिट्टी को तैयार कर प्रतिमा का ढांचा बनाने, आकार देने, सुखाने, रंग-रोगन करने और अंतिम सजावट तक कई चरणों में काम किया जाता है। बड़ी प्रतिमाओं को तैयार करने में अधिक समय और मेहनत लगती है।

30 किलोमीटर के दायरे से लेकर भोपाल-विदिशा तक मांग

अंबाड़ी में तैयार गणेश प्रतिमाओं की मांग आसपास के करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में रहती है। बालमपुर, भदभदा, दीवानगंज, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, कायमपुर, बेरखेड़ी, सलामतपुर, गीदगढ़, महुआखेड़ा, हिनोतिया, शक्ति, पिपरई, मुनारा, करेया, देहरी, मुड़ियाखेड़ा और बांसिया सहित अनेक गांवों में यहां की प्रतिमाएं पहुंचती हैं। अब भोपाल और विदिशा के लोग भी अंबाड़ी के मूर्तिकारों से प्रतिमाएं मंगवा रहे हैं।

सालभर चलता है प्रतिमा बनाने का काम

अंबाड़ी गांव आसपास के क्षेत्र में मूर्ति निर्माण के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहां प्रजापति समाज के कई परिवार सालभर मूर्तियां बनाने के काम से जुड़े रहते हैं। गणेश उत्सव के लिए गणेश प्रतिमाएं, नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमाएं और दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं।

कलाकारों का कहना है कि ग्राहकों की मांग के अनुसार प्रतिमाओं का आकार, डिजाइन और सजावट तय की जाती है। विशेष डिजाइन या अलग आकार की प्रतिमा का ऑर्डर मिलने पर उसे उसी अनुरूप तैयार किया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह पारंपरिक कला आज भी अंबाड़ी के कई प्रजापति परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन बनी हुई है।

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