मादा गाँव में बाघ का हमला, पाड़िया का शिकार, ग्रामीणों में दहशत; तीन दर्जन से अधिक पशुओं पर हमले का दावा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मादा में देर शाम एक बार फिर बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी। बाघ ने गांव निवासी अनिल यादव की पाड़िया का शिकार कर लिया। घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। डिप्टी रेंजर सतीश श्रीवास्तव एवं नाकेदार जगदीश जाटव ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया तथा पशुपालक को मुआवजा दिलाने के लिए प्रकरण उच्च अधिकारियों को भेज दिया है।
क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बाघ और तेंदुए की गतिविधियों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और चिंता है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन्य जीव अब तक तीन दर्जन से अधिक मवेशियों का शिकार कर चुके हैं, जिससे पशुपालकों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि बाघ और तेंदुए का शीघ्र रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाए, ताकि गांवों में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इधर वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। विभागीय अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को रात के समय अकेले बाहर नहीं निकलने, पशुओं को सुरक्षित स्थान पर बांधने तथा वन क्षेत्र के आसपास विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
कलेक्टर ने पहले ही जारी किए थे दिशा-निर्देश
रायसेन जिले के सामान्य पश्चिम वन परिक्षेत्र रायसेन अंतर्गत वृत्त दीवानगंज में बाघ के लगातार विचरण को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पूर्व में ही सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे। निर्देशों में ग्रामीणों को रात्रि में अकेले बाहर न निकलने, आवश्यक होने पर समूह में रहने, बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान अकेले न भेजने तथा पालतू पशुओं को वन क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई थी।
वन विभाग के अनुसार वृत्त दीवानगंज के आसपास लगभग 20 किलोमीटर की परिधि में बाघ की लगातार मूवमेंट दर्ज की जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनहानि रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार हो रहे हमलों और वन्य जीवों की बढ़ती गतिविधियों के कारण मादा, दीवानगंज, अंबाडी तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भय के साये में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।