मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दीवानगंज क्षेत्र में बीते दो दिनों से नरवाई में आग लगने की घटनाओं ने विकराल रूप ले लिया है। छोला और नरखेड़ा गांव के खेतों में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते आसपास के बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। तेज हवा के चलते आग तेजी से फैली और नरखेड़ा, छोला, सेमरा और कर्क रेखा के आसपास स्थित हजारों एकड़ में फैली नरवाई देर रात तक जलकर पूरी तरह राख हो गई।
आग की लपटें इतनी भयंकर थीं कि भोपाल-विदिशा हाईवे 18 के किनारे तक पहुंच गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हाईवे पर करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा और लंबा जाम लग गया। धुएं के घने गुबार के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।हाईवे किनारे लगे हरे भरे पेड़ जलकर राख हो गए तो वही बड़े पेड़ों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

स्थिति उस समय और भयावह हो गई जब आग रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी। कर्क रेखा क्षेत्र में कई दुकानों तक आग पहुंच गई। स्थानीय दुकानदारों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए दुकानों में रखे पानी से आग बुझाने का प्रयास किया, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। हालांकि, इस हादसे में इसाक खान की टपरिया पूरी तरह जलकर खाक हो गई और उसमें रखा सामान भी नष्ट हो गया।
इस भीषण अग्निकांड का सबसे बड़ा असर अब क्षेत्र के पशुपालकों पर देखने को मिलेगा। नरवाई पूरी तरह जल जाने के कारण आगामी तीन महीनों तक पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्तमान में पशु खेतों में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आगजनी की घटनाओं के बावजूद अग्निशमन व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। फायर ब्रिगेड की अनुपलब्धता के कारण समय पर आग पर काबू नहीं पाया जा सका, जिससे नुकसान और बढ़ गया।
यदि प्रशासन जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाता है, तो आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे का संकट और गहराने के साथ ही किसानों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।