दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा नरखेड़ा जमुनिया निनोद सरार सहित कई ग्राम पंचायतों में हुआ आयोजन
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर शुक्रवार को सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, सरार और बालमपुर सहित आसपास की कई पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इन सभाओं में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
बैठकों में सांची के नायब तहसीलदार ललित सक्सेना, दीवानगंज सरपंच गिरजेश नायक, सचिव राम प्रसाद मालवीय, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और पटवारी सुरेश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। स्वाहा सहायता समूह से कोई भी पंचायत में उपस्थित नहीं हुआ , इससे पहले भी ग्राम सभा की बैठक में उपस्थित नहीं हुआ था
ग्राम सभा को संबोधित करते हुए सरपंच गिरजेश नायक ने पंचायती राज व्यवस्था की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों को स्थानीय स्वशासन की भूमिका समझाई। उन्होंने बताया कि पंचायतें गांव के विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और इनके माध्यम से ही योजनाओं का सही क्रियान्वयन संभव है।
सभाओं में पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों द्वारा कई महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए। इनमें पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना, स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देना, “आत्मनिर्भर ग्राम पंचायत” का निर्माण, ग्राम संवाद को सक्रिय करना तथा ‘ग्राम संपदा ऐप’ के माध्यम से संपत्तियों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना शामिल रहा।
इसी दौरान अलका पटवारी सुरेश शर्मा और सचिव रामप्रसाद मालवीय द्वारा बैठक में बताया गया कि कोई भी किसान अपने खेतों कि नरवाई में आग नहीं लगाएगा। शासन ने इस पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान किया है। अगर कोई किसान आग लगाते हुए पकड़ा जाता है या किसी कारणवश खेत में आग लगती है तो उस पर एफआईआर दर्ज होगी। इसलिए कोई भी किसान अपने खेतों की नरवाई में आग ना लगाए।
इसके साथ ही ग्रामीणों के साथ मिलकर ग्राम विकास योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई और आगामी विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई। ग्रामीणों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई, ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।
यह आयोजन ग्रामीण भारत में लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां पंचायत प्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों और आम ग्रामीणों की भागीदारी से समावेशी विकास को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
गौरतलब है कि हर वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य गांव स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना और पंचायतों की भूमिका को सम्मान देना है।