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जाखला नदी का अस्तित्व मिटाने की तैयारी! कैचमेंट एरिया में धड़ल्ले से मिट्टी भराव, प्रशासन मोन

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नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़, बारिश में बाढ़ का खतरा बढ़ा

रामभरोस विश्वकर्मा, ओबेदुल्लागंज रायसेन

एक ओर भारत सरकार और प्रदेश सरकार नदियों, जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर ओबेदुल्लागंज क्षेत्र की जाखला नदी का अस्तित्व ही धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिशें खुलेआम की जा रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोए हुए नजर आ रहे हैं।

कैचमेंट एरिया में हो रहा अवैध मिट्टी भराव
जानकारी के अनुसार नदी किनारे प्लॉट संचालकों और भू-माफियाओं द्वारा जाखला नदी के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर मिट्टी का भराव किया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से न केवल नदी की चौड़ाई और गहराई प्रभावित हो रही है, बल्कि उसके प्राकृतिक बहाव मार्ग को भी बाधित किया जा रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में जाखला नदी सिर्फ नक्शों तक सीमित होकर रह जाएगी।

पहले भी मोड़ा जा चुका है नदी का प्रवाह
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में एक कंपनी द्वारा इसी नदी के बहाव को मोड़ने का कार्य किया जा चुका है। इतना ही नहीं, नदी के आसपास की भूमि पर भी धीरे-धीरे कब्जा जमाया गया, लेकिन प्रशासन ने उस समय भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यही वजह है कि अब अन्य लोग भी नदी क्षेत्र को पाटकर अपने निजी स्वार्थ पूरे करने में लगे हुए हैं।
बरसात में बन सकता है बड़ा खतरा
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों की मानें तो नदी के कैचमेंट एरिया में मिट्टी भराव और अतिक्रमण का सीधा असर बरसात के मौसम में देखने को मिलेगा। यदि नदी का बहाव बाधित हुआ तो पानी अपने प्राकृतिक रास्ते की जगह आबादी वाले क्षेत्रों, खेतों और सड़कों की ओर फैल सकता है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। यह केवल पर्यावरणीय नुकसान नहीं, बल्कि जन-जीवन और संपत्ति के लिए भी गंभीर खतरा है।

जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर राजस्व विभाग, नगर प्रशासन, जल संसाधन विभाग और पर्यावरण से जुड़े अधिकारी अब तक इस मामले में चुप क्यों हैं? क्या किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार किया जा रहा है? जब सरकारें नदियों को पुनर्जीवित करने की बात कर रही हैं, तब जमीनी स्तर पर नदियों को पाटने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जाखला नदी के कैचमेंट एरिया में हो रहे अवैध मिट्टी भराव और अतिक्रमण की तत्काल जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही नदी के मूल स्वरूप को बचाने के लिए राजस्व सीमांकन, अतिक्रमण हटाओ अभियान और स्थायी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
अब भी नहीं चेता प्रशासन, तो जाखला नदी बन जाएगी इतिहास
यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो वह दिन दूर नहीं जब जाखला नदी का नाम तो रहेगा, लेकिन उसका अस्तित्व पूरी तरह मिट जाएगा। सवाल सिर्फ एक नदी का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल, पर्यावरण और सुरक्षा का है।

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