रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह
विंध्याचल पर्वत श्रेणी में स्थित जिले की सबसे ऊँची चोटी सद्भावना शिखर प्राकृतिक सौंदर्य का उदाहरण होने के बावजूद आमजन से दूर प्रतीत होता है जिसका कारण है कठिन और असुरक्षित पहुंच मार्ग जिस के कारण यहां बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं, जबकि यह स्थान जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है।

सिग्रामपुर से पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने वाले सड़क मार्ग से ग्राम कलुमर के समीप समुद्र तल से लगभग 2467 फीट (752 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित यह शिखर जिले का सर्वोच्च बिंदु माना जाता है। यहां से आसपास के गांव, तालाब, पर्वत श्रृंखलाएं और हरियाली के मनोरम दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

बताया गया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2000 से पूर्व तत्कालीन मंत्री स्व. रत्नेश सोलोमन द्वारा शिखर तक पहुंचने के लिए एक कच्चे मार्ग तथा शीर्ष पर एक वॉच टॉवर का निर्माण कराया गया था, जिसे ‘सद्भावना शिखर’ नाम दिया गया। लेकिन समय के साथ रखरखाव के अभाव में मार्ग और वॉच टॉवर दोनों ही अब जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं।

वर्तमान में इस शिखर तक पहुंचने के लिए घने जंगल, पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से भी होकर गुजरना पड़ता है। यह क्षेत्र अब टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, जिससे विकास कार्यों को लेकर प्रशासनिक सतर्कता आवश्यक हो गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मार्ग में स्थित एक प्राचीन कुंआ अब मिट्टी से भर चुका है। पहले घने जंगल वाला यह क्षेत्र अब कुछ स्थानों पर कटे हुए पेड़ों के तनों के रूप में दिखाई देता है, जिससे अवैध कटाई की आशंका भी जताई जा रही है।

लोगों का कहना है कि यदि पर्यावरण संतुलन और वन संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित पहुंच मार्ग और बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएं, तो सद्भावना शिखर न केवल जिले बल्कि पूरे संभाग का प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है।

उल्लेखनीय है कि सिग्रामपुर क्षेत्र पहले से ही किलों, झरनों, प्राचीन कलाकृतियों, भग्नावशेषों, तालाबों और पहाड़ी इलाकों के लिए प्रसिद्ध है। इसके बावजूद जिले की सबसे ऊंची चोटी होने के बाद भी सद्भावना शिखर को अपेक्षित पहचान और पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल सका।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नियमानुसार पहल के साथ वन संरक्षण और पर्यटन विकास की योजना बनाई जाना चाहिए ।