रिपोर्ट धीरज जॉनसन, दमोह
दमोह शहर से लगभग 15 किमी दूर ग्राम गुंजी और नोनपानी के निकट पहाड़ी पर प्राकृतिक गुफाओं में प्राचीन शैलचित्र आज भी इतिहास की गवाही देते प्रतीत हो रहे हैं, शहर से निकट इस स्थान की जानकारी ग्रामीणों को है परंतु यहां कम लोग ही आते जाते है।

यहां पहुंचने के बाद देखा गया कि पहाड़ियां, प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ प्राचीनता को भी संजोए हुए हैं। इन पहाड़ियों पर, पगडंडी और पहाड़ी मार्ग पार कर लगभग 2 किमी चलने के बाद पहुंचने है जहां प्राकृतिक गुफाएं दिखाई देती हैं। समय के साथ साथ इन गुफाओं का स्वरूप संकरा होता जा रहा है, लेकिन अंदर आज भी अलग-अलग रास्तों की झलक मिलती है।

गुफाओं के बाहरी हिस्से की चट्टानों पर लाल रंग से जानवर और जीव-जंतु की प्राचीन आकृतियां बनी हुई हैं। वर्षा और समय के प्रभाव से कई चित्र धुंधले हो चुके हैं, लेकिन कुछ को अब भी स्पष्ट देखा जा सकता है।

स्थानीय ग्रामीण तुलसीराम, वीरेंद्र और दस्सू ने बताया कि पहले वे गुफा के भीतर काफी दूर तक जा चुके हैं, पर अब रास्ते मिट्टी और पानी के भराव से संकरे हो गए हैं। गर्मी के मौसम में यहां बहुत ठंडक रहती है। वर्तमान में भी यहां पानी भरा है जहरीले जीव जंतुओं का बसेरा भी है। लोग कहते है कि इस गुफा के रास्ते लंबे है और अन्य गुफा से जुड़े होंगे,जो शोध का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर यहां पहुंच मार्ग बन जाए, सफाई, सुरक्षा कार्य किया जाए तो हो सकता है इन गुफाओं में छिपा प्राचीन इतिहास उजागर हो।

जानकारों का मानना है कि ऐसे शैलचित्र किसी सभ्यता और उस समय के जनजीवन के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।प्रचार-प्रसार से यह स्थान एक आकर्षक केंद्र भी बन सकता है।