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प्रदेश में कुपोषण की स्थिति एवं समस्याग्रस्त आंगनबाडी केन्द्रों के संबंध में श्वेत-पत्र जारी करें राज्य सरकार: डॉ गोविन्द सिंह

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भोपाल।मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविन्द सिंह एवं क्षेत्रीय विधायक श्री पी.सी. शर्मा ने आज भोपाल शहर की समस्या ग्रस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया। नेताद्वय ने सर्वप्रथम वार्ड क्रमांक 28 डॉ. अम्बेडकर नगर केे आंगनबाड़ी केन्द्र 744 एवं 738 का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि इन आंगनबाडी केन्द्रों में मापदण्ड के अनुसार मूलभूत सुविधायंे नही है, भवन जर्जर हालत में हैं और नाले पर भवन बनाया गया, आस-पास पानी एवं कीचड़ बड़ी मात्रा में भरा रहता है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, बड़ी दुर्घटना की होने की संभावना है। नेताद्वय ने वार्ड क्रमांक 26 सूरज नगर के आंगनबाडी केन्द्र कं्रमांक 791 का औचक निरीक्षण किया, यहां भी भवन नाले किनारे बना है, जिससे गंदी बदूब आती है और यहां खड़ा होना भी मुश्किल हैं, यही नहीं निरीक्षण के दौरान केन्द्र परिसर में आवारा पशु बैठे पाए गए, गोबर एकत्र था। भवन जर्जर हालत मंे होने के साथ विघुत कनेक्शन भी नहीं है।
डॉ गोविन्द सिंह ने कहा कि राजधानी भोपाल में आंगनबाड़ी केन्द्रों की यह दुर्दशा है तोे प्रदेश की अन्य आंगनबाडी/ मिनी आंगनबाडी केन्द्रों की स्थिति क्या होगी? यह गंभीर चिंताजनक है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाडी केन्द्रांे की स्थिति कितनी दयनीय होगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि अभी हाल जारी इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट की रिर्पोट के अनुसार प्रदेश की 97 हजार 735 में से 32 हजार आंगनबाडी केन्द्रों में शौचालय नही है। वहीं 17 हजार से अधिक आंगनबाडी केन्द्रों में पीने के पानी की व्यवस्था नही है और 8 हजार 600 से अधिक केन्द्रों में बच्चों को खाना खाने के लिये थाली, ग्लास एवं चम्मच आदि उपलब्ध नहीं है।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश की आंगनबाडी केन्द्रो में 8 लाख 07 हजार 558 गर्भवती महिलायंे पंजीकृत हैं, लेकिन 9 हजार 335 महिलायें आती ही है। इसी तरह से धात्री माताएं भी 7 लाख से अधित पंजीकृत है। लेकिन लाभान्वित मात्र 9 हजार के लगभग ही है। उन्होने कहा कि प्रदेश में 16 हजार आंगनबाडी केन्द्र कच्चे भवन में संचालित है और लगभग 26 हजार किराये के भवन में तथा 778 कार्यकर्ताओं के भवन में संचालित हो रहे हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आता है जो वर्तमान में मुख्यमंत्री जी के पास है, बावजूद उसके प्रदेश में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कुपोषण पर श्वेत पत्र जारी करने की बात विधान सभा के अन्दर एवं विभाग की समीक्षा बैठक में कही गई थी, किन्तु आज तक श्वेत पत्र जारी करने का साहस नही सरकार नहीं जुटा पायी। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी पोषण आहार का कार्य महिला स्व-सहायता समूह को न देकर पोषण आहार माफियाओं द्वारा संचालित किया जा कर माफियों को उपकृत किया जा रहा है। परिणामस्वरूप पोषण आहार माफिया अरबपति बन बैठे हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि प्रदेश को डेढ़ वर्ष में कुपोषण मुक्त किया जायेगा। विगत 17 वर्षो में यह चिन्ता मुख्यमंत्री जी ने क्यों नही की? पोषण आहार का कार्य आजीविका मिशन के अन्तर्गत स्व-सहायता समूह के माध्यम से कराया जा रहा है किन्तु इन समूहों को पोषण आहार की सप्लाई किनके द्वारा की जा रही, इसकी जांच होना चाहिये। वर्ष 2019-20 में 94 करोड़ रूपए के खिलौने खरीदे गये, किन्तु आंगनबाड़ी केन्द्रोे में उपलब्ध नही कराये गये है, यह चिन्ताजनक एवं जांच का विषय है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की समस्याग्रस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं कुपोषण की भयावह स्थिति पर ‘‘श्वेत पत्र” जारी कर प्रदेश की जनता को वस्तुस्थिति से अवगत कराएं।

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