अंडर ब्रिज में भरगया पानी, जान जोखिम में डाल रेल की पटरी के सहारे 3 घंटे में छात्र-छात्राये पहुंचते हे स्कूल
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाली
ग्राम पंचायत शाहपुर के गांव खेड़ा ,टपरा, पिपराई ,काली टोर, मुनारा गांव के पढ़ने वाले बच्चे और नागरिकों को रोज अपनी जान जोखिम में डालकर तीन रेलवे पटरी पार आना जाना पड़ रहा है। छठी से दसवीं तक पढ़ने वाले बच्चे रोज अपने घर से सुबह 8 बजे निकलते और 10:30 बजे हाई स्कूल सेमरा पहुंचते हैं। वही 11 वीं और 12वीं में पढ़ने वाले बच्चे सुबह अपने घर से 7 बजे दीवानगंज हाई सेकेंडरी स्कूल के लिए निकलते हैं और 10:30 बजे स्कूल पहुंच पाते हैं। जबकि वापस बच्चों को घर पहुंचने में 3 घंटे लगते हैं हाई स्कूल में पढ़ने वाली राधिका वंशकार ,रेणुका लोधी ने बताया कि हम स्कूल आने जाने में इतना थक जाते हैं कि अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पाते हैं। जबकि छठी से आठवीं तक पढ़ने वाली तमन्ना यादव ,तुलसा लोधी सहित कई बच्चों ने बताया कि बारिश के चार महीने पुलिया में पानी भर जाता है जिस कारण हम लोगों को एक किलोमीटर तक रेल की पटरी की गिट्टियों पर चलकर आना-जाना पड़ता है। क्योंकि रेल की पटरी से नीचे कीचड़ ही कीचड़ है। जिसमें से निकलना नामुमकिन है। हमेशा डर लगा रहता है कहीं आगे या पीछे से कोई ट्रेन ना आ जाए।

बता दें कि कुछ साल पहले ग्राम अंबाड़ी छपराई के पास रेलवे क्रॉसिंग फाटक को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। रेलवे पटरियां पार करके बीमार और गर्भवती महिलाओं को तो ले जाना आम बात है। यहां कुछ साल पूर्व ही रेलवे विभाग ने रेलवे फाटक पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। जिसकी खुलने की मांग कई महीने से ग्रामीणों कर रहे हैं । कई किसानों की जमीन रेलवे लाइन के उस पार पड़ती है। किसानों को आने-जाने और अपने वाहन को उस पार ले जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस रेलवे फाटक से 6 गांव के ग्रामीण रेलवे पटरियां पार करते हैं। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता था बता दें कि केमखेड़ी, घोड़ाचौक, पिपरई, कालीटोर, शक्ति, मुनारा आदि गांव के ग्रामीण इसी रास्ते से होकर अपने जरूरी काम के लिए भोपाल, विदिशा, सांची, सलामतपुर, दीवानगंज आदि जगह जाते हैं। कुछ बच्चे स्कूल जाने के लिए रोज रेलवे ट्रक को पार करते हैं जिससे उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहता हैं। भोपाल से बीना तक चलने वाली ट्रेनें इसी मार्ग से होकर गुजरती है। इस लाइन पर हर 15 मिनट मैं एक ट्रेन निकलती है ग्रामीणों को रेलवे पटरी पार करना जान जोखिम में डालना जैसा है। अंबाड़ी छपराई रेलवे फाटक बंद होने से इन ग्रामीणों सहित पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पढ़ रहा था। रेलवे ट्रैक पार करने में जान का खतरा हमेशा बना रहता है। वहीं रेलवे विभाग ने अंडर पुलिया निर्माण कर दी हैं। मगर उसमें भी बारिश के समय कमर कमर पानी भरा रहता है। जिससे वाहन निकलना तो दूर की बात है पैदल निकलना भी मुश्किल है।
छात्रों का कहना हे –
हमारे यहां पांचवी तक स्कूल है पांचवी के बाद हमें हाई स्कूल सेमरा पढ़ने आना पड़ता है हमारी मजबूरी है क्योंकि हमें आगे पढ़ना है पुलिया में बारिश का पानी भरा होने के कारण हम लोग रोज रेल की गिट्टियों पर पैदल चलकर आते जाते हैं।
राधिका वंशकार कक्षा दसवीं
4 महीने बारिश में पुलिया में पानी भरा रहता हैं। इसमें से ना तो कोई पैदल निकल सकता है ना ही कोई गाड़ी निकल सकती है इसलिए हमारे मम्मी पापा गाड़ी से छोड़ने नहीं आ पाते हैं। हम सभी छात्र-छात्राएं 7 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आते जाते हैं।
रेणुका लोधी कक्षा दसवीं