मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व बताया गया है। कांवड़िए अपने घर से गंगा या अन्य पवित्र नदी से जल लेने के लिए निकलते हैं और इसी जल को लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। सावन में कांवड़ यात्रा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसी उद्देश्य को लेकर रोज भोपाल विदिशा हाईवे 18 से कावड़ यात्राएं निकाल रही है।
रविवार को गुजरात जिला भरूच तालुका हंसोट गांव सुनेव खुर्द 16 श्रद्धालु नव जागृति युवक मंडल महाकाल ग्रुप अपने कंधे पर नर्मदा से जल भरकर सूनेव खुर्द से निकल कर काशी विश्वनाथ पैदल यात्रा करते हुए रविवार को भोपाल विदिशा हाईवे से निकले।

कबाड़ियों में बताया है कि हम 1 जुलाई को घर से निकले हैं। 1400 किलोमीटर नंगे पैर पैदल चलकर काशी विश्वनाथ पहुंचकर जल अभिषेक करेंगे। हम प्रतिदिन 65 से 70 किलोमीटर नंगे पैर पदयात्रा करते हुए शिव जी के जयकारे लगाते हुए चल रहे हैं। रास्ते पर जहां भी कोई मंदिर मिलता है वहां पर विश्राम करते हैं और सुबह उठकर स्नान कर शिवजी की पूजा कर पैदल फिर चलने लगते हैं। हमें नहीं मालूम कि कब तक काशी विश्वनाथ पहुंच पाएंगे मगर मन में भावना है कि हम सभी काशी विश्वनाथ पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे। सावन का पावन माह चल रहा है और यह महीना भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय है। न केवल इस मौसम में बारिश होती है, बल्कि शिव भक्त बाबा भोले का जल, दूध और अन्य तमाम सामग्रियों से अभिषेक भी करते हैं। भोले भंडारी के जलाभिषेक के लिए अलग-अलग तीर्थ और कुंभ स्थलों से भी जल लेकर श्रद्धालु शिवालय और ज्योतिर्लिंगों पर जलाभिषेक करते हैं। इसे ही पूरा करने के लिए कांवड़ यात्रा निकाली जाती है।