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संसद में मारपीट, लोगों में तगड़ा गुस्सा…एक कानून पर इस देश में छिड़ गया गृहयुद्ध

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जॉर्जिया की संसद में शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन कम होने की जगह अब और ज्यादा बढ़ता जा रहा है. यह प्रदर्शन एक बिल को लेकर शुरू की गई, जिस पर विपक्ष की सहमति नहीं बन पाई है. इससे पहले भी पिछली साल यानी साल 2023 में इस बिल को पेश किया गया था, जिसके बाद लगातार 2 दिन जम कर विरोध प्रदर्शन किया गया था. इस विरोध को रोकने के लिए बिल पर रोक लगा दी गई थी. वापस से सांसद में जब इस बिल की पेशकश की गई तो ये हिंसा एक बार और भड़क गई.

ईस्टर्न यूरोप के देश जॉर्जिया में विदेशी एजेंट बिल को लेकर एक बार फिर विरोध शुरू हो गया है. इसको लेकर संसद के अंदर मारपीट भी की गई है. तीन दिन से जॉर्जिया के बाहर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. हालात तब ज्यादा बढ़ गया जब प्रदर्शनकारी पुलिस से ही लड़ना शुरू कर दिया, जिसके बाद भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और ब्लैक पेपर का स्प्रे करना शुरू कर दिया. इस दौरान कई प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए. पुलिस की इस कोशिश के बाद से विरोध और बढ़ गया है.

संसद के अंदर हुई मारपीट

दरअसल, यह विरोध तब शुरू हुआ जब संसद में विदेशी एजेंट बिल को लेकर बहस की जा रही थी. इस बहस के दौरान सत्तारूढ़ सरकार की ओर से जॉर्जियाई ड्रीम पार्टी के नेता मामुका मदीनाराड्जे ने इस बिल पर अपना बयान शुरू किया. बयान देने के बीच में ही विपक्षी सांसद अलोके एलिसाश्विली ने अपनी सीट छोड़ कर मामुका पर हमला बोल दिया और उनके चेहरे पर जोरदार मुक्का मार दिया. उनकी इस हरकत के बाद से संसद के अंदर हड़कंप मच गया और बाकी अन्य सांसदों ने मिलकर अलोके के साथ हाथापाई की.

क्या है विदेशी एजेंट बिल

विदेशी एजेंट बिल में कहा गया है कि मीडिया और गैर-व्यावसायिक संगठन जिन्हें विदेश से 20 फीसदी से ज्यादा फंड मिल रहा है उन सभी की पहचान विदेशी एजेंट के तौर पर की जानी चाहिए और उन सभी पर विदेशी शक्ति के लाभ को आगे बढ़ाने के लिए जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए. इस बिल पर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि यह पुतिन सरकार का स्पॉन्सर बिल है. उनका आरोप है कि जिस तरह से रूस में मीडिया और कई ऑर्गनाइजेशन की आवाज को दबाया गया है ठीक उसी तरह से जॉर्जिया में भी स्वतंत्र आवाजें और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को खत्म किया जाएगा.

इससे पहले मार्च साल 2023 में विदेशी एजेंट बिल को संसद में पेश किया गया था. बिल के पेश होने के बाद ही हिंसक विरोध प्रदर्शन किया गया जो कि दो दिनों तक चली, इस विरोध प्रदर्शन के बाद से इस बिल को रोक दिया गया. इस विरोध के बाद से जॉर्जिया में विभाजन शुरू हो गया. जिसमें एक तरफ विपक्षी समूहों, नागरिक समाज, मशहूर हस्तियों और देश के प्रमुख राष्ट्रपति ने एक साथ मिलकर सत्तारूढ़ दल के खिलाफ रैली की.

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