भगवान महावीर का बाल्यावस्था में नाम वर्धमान था। उनका जन्म 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार के वैशाली के नजदीक में हुआ था। राजा के घर में जन्मे महावीर ने तमाम भौतिक सुविधाओं को त्यागकर 30 वर्ष की आयु में घर छोड़कर 12 साल कठोर तप करके कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया और वह तीर्थंकर कहलाएं। उन्होंने दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान महावीर का जन्म हुआ था। इस दिन को जैन धर्म में महावीर जयंति के तौर पर मनाया जाता है। इस बार 14 अप्रैल को महावीर जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। भगवान महावीर के जन्म एक राजपरिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत ही कम उम्र में ऐशो आराम के जीवन का त्याग करके संन्यासी का जीवन व्यतीत करने लगे थे। महावीर जयंती के मौके पर आइए जानते हैं भगवान महावीर के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
भगवान महावीर का जन्म ईसा से 540 वर्ष पहले बिहार के वैशाली गांव कुंडग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और मां का नाम त्रिशला था। जब भगवान महावीर का जन्म जिस नक्षत्र और शुभ योग में हुआ था। उस वजह से राज्य में काफी उन्नति और खुशहाली आई थी। इसी वजह से उनका नाम वर्धमान रखा गया था। स्वामी महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। बहुत ही कम उम्र में उन्होंने माया और मोह को त्याग दिया था और सत्य की खोज में निकल पड़े थे। 12 साल की कठिन तपस्या के बाद भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्त किया।
बताया जाता है कि अपनी 12 सालों की तपस्या के दौरान भगवान महावीर ने महज 349 बार ही भोजन किया था। भगवान महावीर ने ज्ञान की प्राप्ति के बाद लोगों को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। भगवान महावीर ने जैन धर्म के पांच सिद्धांत दिए थे। सत्य अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य का पालन।
बचपन से ही वर्धमान का वैराग्य से लगाव था। धन और राजपाठ से उनका कोई लगाव नहीं था। इस दौरान उनके पिता की मौत हो गई जीवन से वर्धमान की रही सही आस भी खत्म हो गई। जिस वक्त उन्होंने सन्यास लिया तब उनकी उम्र महज 30 वर्ष थी। इसके बाद उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। इस तपस्या के बाद जम्बक वन में ऋजुपालिका नदी के किनारे स्थित साल्व वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस ज्ञान को कैवल्य कहा गया और इसी वजह से भगवान महावीर को केवलिन की उपाधि दी गई। इसके बाद उनके विचारों और उपदेशों से आम लोगों के साथ साथ विशिष्टजन भी प्रभावित होने लगे। चारों ओर उनकी कीर्ति फैलने लगी। इसके बाद उनके अनुयायियों और उनके शिष्यों की संख्या बढ़ने लगी।
कैसे मिला जैन धर्म को नाम
भगवान महावीर ने अपनी इंद्रियों पर काबू पा लिया था। इसी वजह से उनका नाम जितेंद्रिय या जिन कहा जाने लगा। इसी जिन शब्द से जैन शब्द उभ्दव हुआ। जो धर्म जितेंद्रिय होने का उपदेश दे उसे जैन धर्म कहा गया।