रिपोर्ट धीरज जॉनसन, दमोह
गर्मियों के मौसम में पेड़ों से पत्ते गिरना शुरू हो जाते है परंतु इन सूखी पत्तियों को जलाने का दृश्य आम हो चुका है जबकि इससे प्रदूषण और वायु की शुद्धता प्रभावित हो सकती है परंतु अभी भी जागरूकता कम दिखाई देती है। जबकि सूखे पत्तों से कांपोस्ड/ ऑर्गेनिक खाद के साथ जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है।

शहर से सागर की ओर जाने वाले सड़क मार्ग पर दिखाई देने वाले शासकीय संजय निकुंज उद्यान में शनिवार को उद्यान की सीमा पर आग जलती दिखाई दी जिससे झाड़ियां और सूखे पत्ते जलते जा रहे थे। परंतु इसे बुझाया नहीं गया। चौकीदार ने बताया कि रामदास माली सूखे पत्ते और कचरे में आग लगा कर गए पर बुझा कर नहीं गए जिससे आग फैल सकती है।
आश्चर्य यह है कि एक ओर सूखे पत्तों को जलाने से मना किया जाता है या इन्हें एकत्रित करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि इससे खाद बनाने में मदद मिल सकती है और दूसरी तरफ सरकारी उद्यान ही प्राकृतिक संरक्षण के प्रति उदासीन प्रतीत हो रहा है और लापरवाही यह कि गर्मी के मौसम में आग लगा दी जो फैल सकती है क्योंकि बड़ी आग छोटी आग से ही शुरू होती है और यहां विभिन्न प्रकार के पेड़ भी है। राहगीरों ने भी उद्यान पहुंचकर चौकीदार को जानकारी दी कि आग बुझाई जाए,पर चौकीदार भी निरुत्तर रहे और जिम्मेदार को कॉल करते रहे पर शायद वह रिसीव नहीं हुआ।