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महावीर नहीं, वर्धमान जयंती मनाएं : निर्यापक मुनिश्री अभय सागर महाराज

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सागर। निर्यापक मुनिश्री अभय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं से भगवान महावीर की जयंती को “महावीर जयंती” के बजाय “वर्धमान जयंती” के रूप में मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान के अनेक नाम प्रचलित रहे हैं, लेकिन उनका प्रमाणिक एवं मूल नाम वर्धमान था। जैसे किसी व्यक्ति का आधार कार्ड या शैक्षणिक अभिलेखों में अंकित नाम ही प्रमाणिक माना जाता है, उसी प्रकार भगवान का मूल नाम भी वर्धमान ही है। वर्तमान में भी उनका ही शासनकाल चल रहा है।

वीर शासन जयंती के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि आचार्य भगवंत उदाहरण देकर समझाया करते थे कि सावन में गांवों के वृक्षों पर लगाए जाने वाले झूले इस बात के प्रतीक थे कि धर्म के माध्यम से मनुष्य भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचकर संसार सागर से पार हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज यह परंपरा औपचारिकता तक सीमित होकर घरों के छोटे-छोटे झूलों तक सिमट गई है।

उन्होंने कहा कि क्षपक श्रेणी के माध्यम से कर्मों का क्षय होता है। बारहवें गुणस्थान के बाद तेरहवें गुणस्थान को प्राप्त होने पर जीव अरिहंत परमेष्ठी कहलाता है। संसार में जीव अनंत कर्मों का बंध करता है, जिनसे मुक्त होना अत्यंत कठिन है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने चने का उदाहरण दिया कि भुना हुआ चना खेत में बोने पर अंकुरित नहीं होता, क्योंकि उसका बीजत्व समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार कर्मों के क्षय से संसार बंधन भी समाप्त हो सकता है।

मुनिश्री ने बताया कि आगम में “समोशरण” नहीं, बल्कि “शमवशरण” शब्द का उल्लेख मिलता है, जहां सभी जीव अपने कल्याण के लिए एक साथ बैठते हैं। उन्होंने कहा कि गौतम स्वामी प्रथम गणधर थे, जिन्होंने भगवान से ज्ञान प्राप्त किया।

उन्होंने वर्ष की समाप्ति के विभिन्न मानकों का उल्लेख करते हुए कहा कि शासकीय व्यवस्था में 31 मार्च, अंग्रेजी कैलेंडर में 31 दिसंबर तथा वर्तमान में जैन संवत 2552 चल रहा है, जिसके अंतर्गत वीर शासन जयंती मनाई जाती है।

अंत में मुनिश्री ने कहा कि अधिकांश लोगों को णमोकार मंत्र कंठस्थ होने के कारण उसका पाठ यांत्रिक हो जाता है, जबकि एक ग्रंथ में णमोकार मंत्र के जाप की 120 विधियों का उल्लेख है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंत्र का भावपूर्वक अध्ययन एवं साधना करने का आग्रह किया।

मुकेश जैन ढाना ने बताया कि वीर शासन जयंती के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने मुनि संघ को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही 9 अगस्त को होने वाले चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव की तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं, जिसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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