सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्राचीन मंदिर के विस्थापन का मामला गरमाया, प्रशासन विशेषज्ञों से जांच कराने की बात कह रहा
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन के छत्री चौक स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को विस्थापित किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। मंदिर के बाहरी ढांचे को हटाए जाने के बाद अब मंदिर में स्थापित प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं और प्रशासन के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मंदिर की प्रतिमा को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि वह अपने स्थान से आसानी से नहीं हट सकती। इसी बीच सोशल मीडिया पर प्रतिमा को मशीनों के जरिए हटाने और उसकी मजबूती की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाए जाने की खबरें भी सामने आईं। इससे श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ी और मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगी।
IIT इंदौर की टीम आने की खबर का खंडन
इस पूरे मामले के बीच यह खबर भी सामने आई कि प्रतिमा की तकनीकी जांच और स्कैनिंग के लिए इंदौर आईआईटी की टीम उज्जैन पहुंची है। हालांकि, एक मीडिया समूह से चर्चा में आईआईटी इंदौर की ओर से इस दावे का खंडन किए जाने की बात सामने आई है।
आईआईटी इंदौर ने स्पष्ट किया कि उसकी ओर से खड़े हनुमान मंदिर की जांच के लिए कोई टीम नहीं भेजी गई है और इस मामले में संस्थान की कोई भूमिका नहीं है। बताया गया कि प्रतिमाओं को विस्थापित करने से संबंधित विशेषज्ञता भी संस्थान के पास उपलब्ध नहीं है।
प्रशासन का दावा- प्रक्रिया अभी जारी
वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मंदिर और प्रतिमा को लेकर तकनीकी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। प्रतिमा के आधार, उसकी गहराई और मजबूती की स्थिति का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से परीक्षण कराने की बात कही जा रही है।
प्रशासन का यह भी कहना है कि प्रतिमा को जबरन या मशीनों के माध्यम से हटाने को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को सही नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति विशेषज्ञों की जांच और तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
श्रद्धालुओं में बढ़ रही चिंता
प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर के विस्थापन की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में इसे लेकर चिंता और विरोध बढ़ा है। मंदिर परिसर में लगातार लोगों की मौजूदगी बनी हुई है।
सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर उज्जैन में बड़े स्तर पर विकास और यातायात व्यवस्था से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मंदिर के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई है। हालांकि प्रतिमा को किस तरह और कहां स्थापित किया जाएगा, इसको लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा कराई जाने वाली तकनीकी जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्राचीन प्रतिमा की संरचना और आधार की वास्तविक स्थिति क्या है तथा आगे विस्थापन को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।