Let’s travel together.

राजस्थान से मध्य प्रदेश तक ऊंटों का सदियों पुराना सफर, हाईवे-18 पर दिखा राइका समुदाय का कारवां; जाम के बीच लोगों ने बनाए वीडियो

0 7

घटते चरागाह और बदलते दौर ने संकट में डाली ऊंटपालन की परंपरा, अब ज्यादातर भेड़-बकरियों के सहारे परिवार

 मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन

भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर पिछले तीन दिनों से एक अनोखा नजारा राहगीरों और वाहन चालकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। राजस्थान से मध्य प्रदेश की ओर और अब वापस लौटते राइका (रबारी) समुदाय के लोगों का विशाल कारवां हाईवे से गुजर रहा है। रंग-बिरंगी राजस्थानी वेशभूषा, सिर पर साफा, हाथों में लाठियां और ऊंटों की लंबी कतार ने आधुनिक दौर में भी सदियों पुरानी घुमंतू संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।

हाईवे से ऊंटों और पशुओं के गुजरने के कारण कई स्थानों पर बार-बार जाम की स्थिति भी बनी। हालांकि इस अनोखे कारवां को देखने के लिए वाहन चालक और राहगीर रुकते नजर आए। कई लोगों ने राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा और ऊंटों की कतार का अपने मोबाइल फोन से वीडियो और फोटो बनाकर इस दृश्य को यादों में कैद किया।

चारे की तलाश में हर साल मध्य प्रदेश आते हैं पशुपालक

राइका समुदाय के लोगों के अनुसार, उनका जीवन पूरी तरह पशुधन पर निर्भर रहा है। राजस्थान के पाली, जैसलमेर, जोधपुर और आसपास के शुष्क क्षेत्रों में चारे और पानी की कमी होने पर ये परिवार हर वर्ष सितंबर-अक्टूबर के दौरान मध्य प्रदेश की ओर निकलते हैं। यहां फसल कटाई के बाद खाली खेत, जंगल और प्राकृतिक चरागाह उनके पशुओं के लिए चारे का सहारा बनते हैं।

लगभग सात महीने मध्य प्रदेश में रहने के बाद बारिश का मौसम शुरू होने पर मई से जुलाई के बीच यह समुदाय अपने पशुओं के साथ वापस राजस्थान लौट जाता है। यह सदियों पुरानी मौसमी यात्रा आज भी लगातार जारी है।

अब ऊंट कम, भेड़-बकरियों पर निर्भरता बढ़ी

काफिले में शामिल पाबूराम रबारी ने बताया कि पहले उनके परिवारों के पास बड़ी संख्या में ऊंट होते थे। ऊंटपालन ही उनकी पहचान और आजीविका का मुख्य साधन था। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। जंगल और चरागाह कम होने, गोचर भूमि पर अतिक्रमण तथा शहरों और हाईवे के विस्तार के कारण पारंपरिक पशुपालन मुश्किल होता जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब उनके पास ज्यादातर भेड़ और बकरियां ही हैं। ऊंटों की संख्या लगातार घट रही है और नई पीढ़ी भी पारंपरिक पशुपालन से दूर होकर मजदूरी तथा छोटे व्यवसायों की ओर बढ़ रही है।

आधुनिक विकास ने रोक दिए पारंपरिक रास्ते

राइका समुदाय को सदियों से ऊंटों का रक्षक माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने ऊंटों की देखभाल का दायित्व इसी समुदाय को सौंपा था। लेकिन आधुनिक परिवहन व्यवस्था में ऊंटों की उपयोगिता कम होने के साथ-साथ पशुपालकों के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

गोचर भूमि का सिकुड़ना, वन क्षेत्रों में चराई पर प्रतिबंध, आर्थिक परेशानियां और पारंपरिक मार्गों पर सड़क व शहरों का विस्तार इस समुदाय की जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है।

हाईवे पर दिखा चलता-फिरता लोक संग्रहालय

भोपाल-विदिशा हाईवे-18 से गुजरता यह कारवां केवल पशुपालकों और ऊंटों का समूह नहीं, बल्कि भारत की जीवंत लोक संस्कृति का प्रतीक है। एक ओर जहां आधुनिकता और विकास तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सदियों पुरानी घुमंतू परंपराएं अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं।

यदि चरागाहों के संरक्षण, पारंपरिक पशुपालन को प्रोत्साहन और घुमंतू पशुपालकों के लिए ठोस योजनाएं नहीं बनाई गईं, तो आने वाले समय में ऐसे कारवां केवल इतिहास की तस्वीरों में नजर आएंगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

धरहरकला, पुष्पराजगढ़ (अनूपपुर) के स्वयंभू श्री सिद्ध बटुकगणेश जी     |     उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ दीं     |     खड़े हनुमान मंदिर की स्कैनिंग को लेकर संशय, IIT इंदौर ने कहा- हमारी कोई टीम नहीं पहुंची     |     हरतालिका तीज एवं गणेश चतुर्थी पर गूंजेगा गणपति बप्पा का जयघोष     |     कोयतोड़ गोंडवाना महासभा की जिला कमेटी रायसेन का धरना प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी     |     गणेश चतुर्थी पर आस्था का सैलाब, हाट बाजारो में भक्तों की भारी भीड़     |     राजस्थान से मध्य प्रदेश तक ऊंटों का सदियों पुराना सफर, हाईवे-18 पर दिखा राइका समुदाय का कारवां; जाम के बीच लोगों ने बनाए वीडियो     |     चार दिन की उमस भरी गर्मी के बाद झमाझम बारिश, हाट बाजार में सब्जी की दुकानों में भरा पानी     |     वाहन सहित चोरी का कबाड़ जप्त आरोपी गिरफ्तार,विधानसभा पुलिस की कार्यवाही     |     शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811